करोड़ों का अस्पताल फिर भी मरीज बेहाल: मसूरी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर फूटा गुस्सा, 'मिशन 2027' की दी चेतावनी
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं के दावों के बीच स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। मसूरी उप जिला चिकित्सालय में बुनियादी सुविधाओं और डॉक्टरों की भारी कमी से नाराज स्थानीय निवासियों का गुस्सा शनिवार को सड़कों पर फूट पड़ा। देवभूमि जनकल्याण विकास एकता समिति के बैनर तले भारी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने पिक्चर पैलेस चौक पर एकत्रित होकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर आरोप है कि सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट फूंक कर अस्पताल की आलीशान इमारत तो खड़ी कर दी, लेकिन इसके भीतर की आत्मा यानी जरूरी जीवनरक्षक सुविधाएं आज भी अधूरी हैं।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जय प्रकाश राणा ने अस्पताल की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि मसूरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज तक डायलिसिस की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। इसके कारण क्षेत्र के दर्जनों किडनी रोगियों को सप्ताह में दो से तीन बार मजबूरन देहरादून के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के इस दौर में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए पहाड़ों से मैदान तक की यह लंबी और उबड़-खाबड़ दूरी किसी प्रताड़ना से कम नहीं है, जिससे उनकी जान का खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा, आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि इस उप जिला चिकित्सालय में कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर) और न्यूरोलॉजिस्ट (नसों के डॉक्टर) जैसे अति-विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती ही नहीं की गई है। स्थिति यह है कि यदि पहाड़ों में कोई सड़क दुर्घटना हो जाए, किसी को हार्ट अटैक आ जाए या कोई अन्य गंभीर इमरजेंसी खड़ी हो, तो यहां के डॉक्टरों के पास प्राथमिक उपचार देकर मरीज को सीधे देहरादून रेफर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। इस 'रेफरल सिस्टम' के चलते कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।समिति के पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय राजनीति पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मसूरी क्षेत्र के विधायक और वर्तमान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को इस गंभीर समस्या से कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। बावजूद इसके, अब तक शासन-प्रशासन के स्तर से कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकला है। ऐसा लगता है कि सरकार पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के आम नागरिकों की स्वास्थ्य जरूरतों को लेकर कतई गंभीर नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मसूरी उप जिला चिकित्सालय में आधुनिक डायलिसिस यूनिट स्थापित नहीं की गई और खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को नहीं भरा गया, तो यह आंदोलन केवल पिक्चर पैलेस चौक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे पहाड़ी क्षेत्र में एक व्यापक जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। समिति ने हुंकार भरते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का यह गंभीर मुद्दा आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भी सबसे प्रमुख चुनावी विषय बनेगा, और जनता नेताओं से इसका हिसाब मांगेगी।