मुजफ्फरनगर कांड शहादत दिवसः प्रदेशभर में गूंजा राज्य आंदोलन का दर्द! नैनीताल में यूकेडी ने शहीद आंदोलनकारियों को किया याद
नैनीताल। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में 2 अक्टूबर 1994 का दिन आज भी संघर्ष, पीड़ा और बलिदान की स्मृति के रूप में याद किया जाता है। पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर में हुई हिंसक कार्रवाई की बरसी पर शुक्रवार को प्रदेशभर में शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। नैनीताल में भी उत्तराखंड क्रांति दल ने मुजफ्फरनगर कांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं और राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों ने शहीद आंदोलनकारियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि पृथक राज्य की मांग के पीछे पहाड़ के लोगों के विकास, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद थी। आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन पहाड़ की कई मूलभूत समस्याएं आज भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन लंबे संघर्ष और असंख्य लोगों के त्याग का परिणाम था। मुजफ्फरनगर कांड को राज्य आंदोलन के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में गिनाते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। राज्य आंदोलनकारियों ने प्रदेश की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार की समस्या बढ़ी है और पहाड़ के प्राकृतिक संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को राज्य के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ ही स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन, रोजगार की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि राज्य आंदोलन का उद्देश्य केवल अलग प्रशासनिक इकाई का गठन नहीं था, बल्कि ऐसा उत्तराखंड बनाना था जहां पहाड़ के लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की बेहतर सुविधाएं मिल सकें।