नैनीताल:कैंची धाम में आस्था का सैलाब, पहाड़ की सड़कें बेहाल! मां नयना देवी व्यापार मंडल अध्यक्ष पुनीत टंडन बोले- ट्रैफिक रोकना समाधान नहीं, नीति बनाइए, प्रशासन दे प्लान फ्रेमवर्क
नैनीताल। कैंची धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और इसके चलते पहाड़ में पैदा हो रही ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर माँ नैना देवी नैनीताल व्यापार मंडल ने सरकार से स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति बनाने की मांग की है। व्यापार मंडल का कहना है कि कैंची धाम में बढ़ती आवाजाही का असर केवल भवाली-कैंची धाम मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि नैनीताल, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और रानीखेत की ओर आने-जाने वाले स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक मूल समस्या कैंची धाम को लेकर स्पष्ट नीतिगत ढांचे (Policy Framework) के अभाव की है। उनका कहना है कि जिस तेजी से यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, उसके अनुरूप यातायात, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार अभी नहीं हुआ है।
टंडन ने सरकार से कैंची धाम के लिए मैक्रो और माइक्रो स्तर पर दोहरी रणनीति अपनाने की मांग की है। दीर्घकालिक स्तर पर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, दिल्ली-काठगोदाम समेत प्रमुख शहरों के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने, वंदे भारत जैसी ट्रेनों के संचालन तथा एयरपोर्ट के तेजी से विकास का सुझाव दिया गया है, ताकि पहाड़ी सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम किया जा सके।
वहीं, जब तक स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित पंजीकरण व्यवस्था के जरिए नियंत्रित करने की मांग की गई है। व्यापार मंडल का तर्क है कि मौजूदा संसाधनों की क्षमता को ध्यान में रखे बिना हर मंगलवार और शनिवार को देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए रास्ते खोलना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है।
व्यापार मंडल ने हाल में रिलीज हुई फिल्म के बाद कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में और तेजी से बढ़ोतरी का भी जिक्र किया है। संगठन के अनुसार, धार्मिक पर्यटन का यह विस्तार स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसके लिए समानांतर रूप से बुनियादी सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
टंडन ने सुबह चार बजे से रात दस बजे तक पहाड़ में वाहनों की आवाजाही रोकने जैसी व्यवस्थाओं को स्थायी समाधान मानने से भी इनकार किया। उनका कहना है कि लंबे समय तक ट्रैफिक प्रतिबंध लगाने से समस्या का मूल समाधान नहीं होगा और इसका असर दूसरे पर्वतीय क्षेत्रों में जाने वाले स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों पर भी पड़ेगा।
व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री से कैंची धाम के लिए जल्द स्पष्ट नीतिगत रूपरेखा तैयार करने, वरिष्ठ अधिकारियों की Empowered Committee गठित करने तथा स्थानीय प्रशासन, व्यापारियों और अन्य संबंधित स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि जब तक आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो जातीं, तब तक श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित करने के व्यावहारिक विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।
पुनीत टंडन ने कहा कि समय रहते इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो बढ़ती भीड़ और सीमित बुनियादी ढांचे के बीच पैदा होने वाली अव्यवस्था का असर स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और क्षेत्र की समग्र व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से कैंची धाम को लेकर तत्काल दीर्घकालिक नीति बनाने का आग्रह किया है।