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नैनीताल/हल्द्वानी:गौलापार के किसान नरेंद्र मेहरा सिर्फ एक पौध से 25 किलो हल्दी उगाकर आये चर्चा में,उद्यान विज्ञानी भी हुए हैरान,जल्द हो सकता है इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज

editor
  • Kanchan Verma
  • March 04, 2022 06:03 AM
Nainital / Haldwani: Gaulapar farmer Narendra Mehra came in the discussion after growing 25 kg turmeric from just one plant, horticulturists were also surprised, may soon be named in India Book of Records

नैनीताल जिले के हल्द्वानी गौलापार निवासी किसान नरेंद्र सिंह मेहरा ने खेती की दिशा में करीब 25 किलोग्राम की हल्दी केवल एक पौध से उगाकर नया रिकॉर्ड बना दिया और अब नरेंद्र सिंह मेहरा सुर्खिया बंटोर है। हालांकि ये रिकॉर्ड अभी दर्ज नही हुआ है लेकिन जल्द ही इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नरेंद्र सिंह मेहरा का नाम दर्ज हो जायेगा,इसके लिए टीम द्वारा उन्हें फ़ोन भी आया है।
दरअसल प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा पिछले कई वर्षों से जैविक खेती कर रहे है और आये दिन नए नए रिकॉर्ड बनाकर किसानों को हैरत में डाल देते है। इस बार उन्होंने एक पौध से करीब 25 किलो (24.140किलो) हल्दी उगा दी। आश्चर्यजनक बात ये है कि एक किलो बीज से 10 से 12 किलो ही हल्दी पैदा होती है लेकिन नरेंद्र मेहरा ने केवल एक पौध से 25 किलो के करीब हल्दी उत्पादित की है जो अपने आप मे किसी बड़े रिकॉर्ड से कम नही है। खेती की दिशा में नरेंद्र मेहरा के नाम ये और उपलब्धि दर्ज हुई है। हल्दी की इस जड़ को देखने लोग दूर दूर से उनके घर आ रहे है,उनके घर मीडिया वालों का भी तांता लगा हुआ है क्योंकि उद्यान विभाग इसे अप्रत्याशित मान रहा है और नरेंद्र मेहरा द्वारा उगाई गयी एक पौध से 25 किलो की हल्दी के दावे को परखने की बात कह रहा है। 
वही हल्दी के उत्पादन पर नरेंद्र सिंह मेहरा ने बताया कि दो वर्ष पहले उन्होंने घर के पास पानी का टैंक बनवाया। टैंक की खुदाई के दौरान निकली मिट्टी में कुछ दिनों बाद हल्दी का पौधा उग आया। पहले वर्ष इससे तीन-चार कोपल निकली। जिसके किनारे में वर्मी कंपोस्ट (गोबर की जैविक खाद) डाली। कीटनाशक रोकथाम के लिए तरल जैविक खाद का छिड़काव किया। पतझड़ में पत्तियां झड़ गईं, लेकिन अगले वर्ष फिर नई कोपल निकल आई। कंद के आसपास की मिट्टी निकालकर फिर से जैविक खाद दी। नरेंद्र मेहरा ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने हल्दी के पौधे का खुदान किया। पौधा उनकी उम्मीद से अधिक विस्तार लिए था। गैंती व दो मजदूरों की मदद से हल्दी की कंद को निकाला। मेहरा ने बताया कि जब उसे तराजू में तोला तो वह 24.140 किलो निकली।  जब से ये खबर सोशल मीडिया मे वायरल हुई है तब से नरेंद्र मेहरा को देश के विभिन्न हिस्सों से फोन आ रहे हैं। हरियाणा, पंजाब के कुछ किसानों के अलावा कृषि विज्ञानी भी फोन कर रहे हैं। इतना ही नही उनकी इस उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम ने भी फ़ोन कर इस रिकॉर्ड को दर्ज करने की बात कही है। 
आपको बता दें कि हल्दी जिंजिवरेंसी कुल का पौधा हैं. इसका का वानस्पतिक नाम कुर्कमा लांगा हैं. इसकी उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया में हुई हैं. हल्दी का उपयोग प्राचीनकाल से विभिन्न रूपों में किया जाता आ रहा हैं, क्योंकि इसमें रंग महक एवं औषधीय गुण पाये जाते हैं. हल्दी में जैव संरक्षण एवं जैव विनाश दोनों ही गुण विद्यमान होते है। अमूमन हल्दी का उत्पादन सभी प्रकार की मिट्टी में किया जा सकता हैं, परंतु जल निकास उत्तम होना चाहिए. इसका पीएच 5 से 7.5 होना चाहिए. हल्दी की खेती करने के लिए दोमट, जलोढ़, लैटेराइट मिट्टी, जिसमें जीवांश की मात्रा अधिक हो, वह इसके लिए अति उत्तम है. पानी भरी मिट्टी इसके लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त होती है,वही नरेंद्र मेहरा ने एक पौध से 25 किलो तक हल्दी का उत्पादन जैविक खाद(वर्मी कम्पोस्ट) और टैंक की खुदाई से निकली मिट्टी द्वारा कर सबको चकित कर दिया है।


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