नैनीतालः शोध को समाज की समस्याओं के समाधान और सरकारी नीतियों से जोड़ने की पहल! दस दिवसीय रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला शुरू
नैनीताल। कुमाऊं यूनिवर्सिटी के डीएसबी कैंपस में शोध को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और समाजोपयोगी बनाने के उद्देश्य से समाजशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से दस दिवसीय रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों, सांख्यिकीय विश्लेषण और कंप्यूटर आधारित तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। बदलते सामाजिक परिवेश में शोध को केवल सैद्धांतिक न रखकर उसे समाज की समस्याओं के समाधान और सरकार की नीतियां बनाने में भी उपयोगी बनाना जरूरी है। कार्यशाला में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों से शोधार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। विशेषज्ञों के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध की प्रक्रिया, आधुनिक शोध पद्धतियों, डिजिटल तकनीक, कंप्यूटरीकरण और सांख्यिकीय विश्लेषण के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ समाज की चुनौतियां और समस्याएं भी बदल रही हैं। ऐसे में इन समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए शोध में आधुनिक तकनीकों और नए तरीकों को अपनाना आवश्यक है। शोध के जरिए प्राप्त आंकड़ों और निष्कर्षों का उपयोग न केवल सामाजिक समस्याओं के समाधान में किया जा सकता है, बल्कि सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को तैयार करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। प्रो. ज्योति जोशी ने बताया कार्यशाला में पारंपरिक और सैद्धांतिक शोध का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय में एक्शन ओरिएंटेड रिसर्च यानी कार्रवाई और समाधान पर केंद्रित शोध की आवश्यकता बढ़ रही है। इसका उद्देश्य शोध से प्राप्त निष्कर्षों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करना और आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में उनका उपयोग सुनिश्चित करना है। कार्यशाला के समापन पर संयोजक प्रोफेसर दीपक और डॉ. दीपक पालीवाल की ओर से रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो भविष्य में अन्य शोधार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।