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नैनीताल:लोअर मॉल रोड या अधिकारियों का अंतहीन प्रयोग?किसकी शह पर चल रहा तारीखों का खेल?अधिकारियों की वादा खिलाफी से गुस्साए पुनीत टंडन का एलान फिर बैठेंगे धरने पर!

editor
  • Kanchan Verma
  • November 01, 2026 06:11 AM
Nainital: Lower Mall Road or the officials' endless experiment? Who is instigating this game of dates? Angered by the officials' breach of promise, Puneet Tandon announces he will stage another protest!

नैनीताल। 

नैनीताल की लोअर मॉल रोड शायद देश की ऐसी सड़क बनती जा रही है, जिसके खुलने की तारीख तो बार-बार तय होती है, लेकिन वह तारीख कभी आती नहीं। अधिकारी आश्वासन देते हैं, नई समयसीमा तय होती है, बैठकें होती हैं, भरोसे दिए जाते हैं, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात! अगस्त के बाद अक्टूबर बीत गया और अब एक नवंबर भी आ गई, मगर लोअर मॉल रोड अब भी बंद है। सड़क का निर्माण कब पूरा होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। 

करीब एक साल से बंद लोअर मॉल रोड को लेकर अब एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। निर्माण कार्य में हो रही देरी के खिलाफ पूर्व में धरने पर बैठे पुनीत टंडन ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्रशासन को आखिरी चेतावनी दे दी है। उनका ऐलान है कि यदि 10 नवंबर तक सड़क का काम पूरा कर इसे यातायात के लिए नहीं खोला गया तो 11 नवंबर से वह उसी स्थान पर दोबारा धरने पर बैठेंगे। इस बार उनका उपवास भी शुरू होगा और वह दोपहर एक बजे के बाद जल और अन्न ग्रहण नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि लोअर मॉल रोड की बदहाली और निर्माण में लगातार हो रही देरी के खिलाफ पुनीत टंडन ने 15 अगस्त से धरना शुरू किया था। उनके आंदोलन के बाद विभाग की ओर से 10 अक्टूबर तक सड़क खोलने का लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बाद उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग को एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दी। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस सड़क को 10 अक्टूबर तक खोलने का भरोसा दिया गया था, वह नवंबर की पहली तारीख को भी बंद पड़ी है। यानी आश्वासन की समयसीमा पूरी हो गई, लेकिन सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ।

पुनीत टंडन ने वीडियो में तंज कसते हुए कहा कि एक कहावत है 'इस रात की सुबह नहीं' और नैनीताल के संदर्भ में यह कहावत अब सटीक बैठती दिखाई दे रही है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि वह नैनीताल के लिए ऐसी स्थिति नहीं बनने देंगे। उनका सवाल है कि आखिर कौन सा ऐसा ठेकेदार है और किसके संरक्षण में यह काम इस तरह चल रहा है कि अधिकारियों की ओर से दी गई हर तारीख निकल जाती है, लेकिन निर्माण पूरा नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और मुख्यमंत्री के सचिव स्तर पर आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। 10 अक्टूबर को कैंची धाम में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी भरोसा दिया गया था कि मामला नवंबर तक नहीं खिंचना चाहिए, लेकिन एक नवंबर को भी मौके पर रेलिंग लगाने का काम चल रहा है।

सड़क खोलने की तारीखें तय करने वाले अधिकारियों को शायद यह बताने की जरूरत है कि कैलेंडर में महीने बदलने से निर्माण कार्य पूरा नहीं होता। लोअर मॉल रोड कोई ऐसा प्रोजेक्ट नहीं है, जिसकी समयसीमा केवल बैठकों और आश्वासनों में पूरी कर दी जाए। इसका बंद रहना स्थानीय लोगों, कारोबारियों और पर्यटकों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता और डिजाइन पर भी पुनीत टंडन ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सड़क किनारे बनाई जा रही रेलिंग जरूरत से ज्यादा ऊंची और भद्दी है। मलबे को रोकने के लिए रेलिंग के पीछे एक दीवार और उसके सहारे दूसरी संरचना तैयार की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतनी भारी-भरकम संरचना बनाने की जरूरत क्या है? जब पुरानी रेलिंग का इस्तेमाल किया जा सकता था तो उसे हटाकर नई और इतनी ऊंची दीवार बनाने पर सरकारी धन क्यों खर्च किया जा रहा है? उनका आरोप है कि नैनीताल के सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनका डिजाइन शहर की खूबसूरती के अनुरूप नहीं है। उन्होंने निर्माण में अनावश्यक खर्च और तकनीकी औचित्य पर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुनीत टंडन ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को काम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया। उनका पूर्व का उपवास समाप्त नहीं हुआ था, बल्कि स्थगित किया गया था। अब 10 नवंबर तक सड़क नहीं खुली तो 11 नवंबर को वह उसी स्थान पर धरने पर बैठेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इस बार दोपहर एक बजे के बाद जल और अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। उनके शब्दों में, वह अपनी जुबान पर अडिग हैं और अंतिम सांस तक धरने पर बैठे रहेंगे।

आखिर लोअर मॉल रोड के मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय कौन करेगा? क्या हर बार नई तारीख देकर जनता को इंतजार कराना ही समाधान है? क्या ठेकेदार और कार्यदायी विभाग से काम में हो रही देरी का हिसाब नहीं मांगा जाएगा? आखिर कब तक नैनीताल की एक महत्वपूर्ण सड़क अधिकारियों के आश्वासनों और निर्माण की धीमी रफ्तार के बीच फंसी रहेगी? क्या रोज आंदोलन ही किए जाएंगे तब प्रशासन सख्ती से काम करेगा? 


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