नैनीताल:मां नंदा-सुनंदा का डोला निकला नगर भ्रमण पर,जयकारे,भंडारे और नम आंखें… मायके से विदा हुईं मां नंदा-सुनंदा
नैनीताल। मां नंदा-सुनंदा के जयकारों, ढोल-दमाऊ की थाप और भक्ति के बीच बुधवार को नंदा देवी महोत्सव के समापन दिवस पर मां का डोला नगर भ्रमण के लिए निकला। सप्ताहभर तक मायके नैनीताल में श्रद्धालुओं को दर्शन देने के बाद मां नंदा-सुनंदा की विदाई का क्षण आया तो पूरा शहर भावुक नजर आया।
फोटो: उदित साह
विदाई के इस अवसर पर नैनीताल में जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की ओर से भंडारों का आयोजन किया गया। डोला यात्रा के मार्ग में भक्तों के लिए हलुआ, पूरी, सब्जी और काले चने का प्रसाद तैयार किया गया। राहगीरों, श्रद्धालुओं और शोभायात्रा में शामिल लोगों ने भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया। कई स्थानों पर भक्त पूरे उत्साह के साथ सेवा में जुटे नजर आए।

मां की विदाई को लेकर शहर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा।नयना देवी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और देवी भोग के बाद मां नंदा-सुनंदा का डोला निकाला गया।

कुमाऊं की लोक आस्था में नंदा देवी को बेटी के रूप में मायके आने और फिर अपने ससुराल लौटने वाली देवी के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि महोत्सव का आगमन जहां उत्सव और स्वागत का प्रतीक होता है, वहीं विदाई का क्षण भावनाओं से भर देता है। मां नंदा-सुनंदा को मायके से विदा करते समय श्रद्धालु अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना करते हैं।
नंदा-सुनंदा की विदाई के साथ नैनीताल में सप्ताहभर से चल रहा आस्था और उल्लास का यह पर्व अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया। नगर भ्रमण के बाद परंपरानुसार मां की प्रतिमाओं का नैनीझील में विसर्जन किया जाएगा।
मां की विदाई के साथ भंडारों में बंटा प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की उस परंपरा और आस्था का हिस्सा रहा, जिसमें बेटी के मायके आने की खुशी और विदाई की भावुकता दोनों पूरे समाज के साथ साझा होती हैं।