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नैनीताल:ज्योलिकोट में दूषित पानी से बीमार पड़ रहे लोगों को लेकर पुनीत टंडन ने घेरा शासन प्रशासन! ई-कोलाई ने खोली सिस्टम की पोल,पानी में जहर, लोग बीमार,सिस्टम कमेटी बनाने में ही उलझा

editor
  • Kanchan Verma
  • September 07, 2026 07:09 AM
Nainital: Puneet Tandon has cornered the administration over people falling ill due to contaminated water in Jeolikote. E. coli has exposed the system's failure—the water is toxic and people are sick, yet the system remains bogged down in the process of merely forming a committee.

नैनीताल।

ज्योलीकोट में दूषित पेयजल और लगातार सामने आ रही बीमारियों के मामले को लेकर मां नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं तो अब तक इस मामले की विस्तृत जांच के लिए कमेटी का गठन क्यों नहीं किया गया। आखिर इस पूरे मामले की जड़ क्या है, इसका पता लगाना बेहद जरूरी है।

पुनीत टंडन ने कहा कि ज्योलीकोट में जिस तरह की स्थिति सामने आ रही है, वह केवल एक क्षेत्र की समस्या मानकर नजरअंदाज करने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि दूषित पानी और उससे फैल रही बीमारी के मूल कारण का पता नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में नैनीताल समेत उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि विशेषज्ञों की एक टीम तत्काल ज्योलीकोट भेजी जाए और पानी के दूषित होने तथा लोगों के बीमार पड़ने के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।

उन्होंने नैनीताल की स्थिति का भी हवाला देते हुए कहा कि शहर में लगातार हो रहे निर्माण, बढ़ते कचरे और सीवर का पानी झील में जाने जैसी गंभीर समस्याओं के बावजूद इन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। टंडन ने कहा कि यदि हालात इसी तरह चलते रहे तो हमें भविष्य में किसी बड़ी आपदा का इंतजार करना पड़ सकता है। “नैनीताल में अगर हम इसी तरह चलते रहे तो एक दिन हमें मौतों के बीच बैठना पड़ेगा,” उन्होंने चिंता जताते हुए कहा।

टंडन ने कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल तत्कालीन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रूट कॉज (मूल कारण) सामने लाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आज आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ संस्थाएं उपलब्ध हैं तो बीमारी फैलने और पानी के प्रदूषण के कारणों का पता लगाने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

उन्होंने शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की टीम को तत्काल ज्योलीकोट भेजा जाए और पानी की गुणवत्ता, जलस्रोत, पेयजल लाइन तथा आसपास के सीवेज सिस्टम की व्यापक जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।


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