• Home
  • News
  • Nainital: Rain threatens trees, two trees fell, and a hundred-year-old cedar tree has dried up, causing panic among residents. No action has been taken even a month after the complaint.

नैनीताल:बारिश में पेड़ों का खतरा बढ़ा,दो पेड़ गिरे,सूखे हुए सौ साल पुराने देवदार के पेड़ को लेकर भी लोगों में दहशत!एक महीने पहले ही वन विभाग को दी थी लिखित शिकायत

editor
  • Kanchan Verma
  • July 09, 2026 05:07 PM
Nainital: Rain threatens trees, two trees fell, and a hundred-year-old cedar tree has dried up, causing panic among residents. No action has been taken even a month after the complaint.

नैनीताल में लगातार हो रही बारिश के बीच पेड़ों के गिरने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को पवेलियन होटल  और मेट्रोपोल के पास पेड़ गिरने की घटनाओ के बाद अब मल्लीताल स्थित हार्थडन कम्पाउंड, हेड पोस्ट ऑफिस के निकट खड़ा करीब 100 वर्ष पुराना सूखा देवदार स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है।


क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि यह विशालकाय देवदार पूरी तरह सूख चुका है। तेज हवा, बारिश और आंधी के दौरान इसकी सूखी टहनियां लगातार टूटकर नीचे गिर रही हैं। पेड़ घनी आबादी और मकानों के बीच स्थित है, साथ ही लंगूर और बंदरों के पेड़ पर कूदने से भी भारी शाखाएं नीचे गिर जाती हैं। अगर ये विशालकाय पेड़ पूरा गिर गया तो आसपास के मकानों, वाहनों और वहां से गुजरने वाले लोगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

 

निवासियों ने बताया कि उन्होंने जून माह में ही वन विभाग को लिखित शिकायत देकर पेड़ का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी। आवेदन में स्पष्ट किया गया था कि पेड़ पूरी तरह सूख चुका है और लोगों की जान-माल के लिए खतरा बन गया है। आरोप है कि शिकायत दिए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो मौके का निरीक्षण किया गया और न ही पेड़ को हटाने की कोई कार्रवाई हुई।
नैनीताल में मूसलाधार बारिश और पेड़ों के गिरने से चिंतित क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन को अब इस सूखे देवदार के मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

 

पेड़ों को हटाने का क्या है नियम?

सूखा, रोगग्रस्त या लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके पेड़ों को बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता। पहले संबंधित वन विभाग या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाता है। अगर जांच में पेड़ के खतरनाक होने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार उसे काटने या सुरक्षित तरीके से हटाने की अनुमति दी जाती है। उद्देश्य यह होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन बना रहे।


संबंधित आलेख: