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नैनीताल:हाई कोर्ट के आदेश का दुरुपयोग और तथ्य छिपाने पर सख्त रुख, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल द्वारा आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज, गिरफ्तारी की तलवार लटकी।

editor
  • Kanchan Verma
  • July 24, 2026 01:07 PM
Nainital: Strict stand on misuse of High Court order and concealment of facts, anticipatory bail of accused rejected by District and Sessions Judge Nainital.

नैनीताल। 

नैनीताल के बहुचर्चित भूमि धोखाधड़ी मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी की कोर्ट ने आरोपी रोशन लाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा की सशक्त पैरवी और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट में दायर अग्रिम जमानत याचिका में दी गई शर्तों का पालन नहीं किया और बाद में उसे वापस लेकर जिला कोर्ट में नया आवेदन प्रस्तुत कर दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
मामला थाना भवाली में दर्ज एफआईआर संख्या 12/2026 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता शीला मेहता ने आरोप लगाया कि रोशन लाल ने मेहरा गांव स्थित एक नाली भूमि को 26 लाख रुपये में बेचने का इकरारनामा किया। इस सौदे के तहत शिकायतकर्ता ने अलग-अलग समय पर 8 लाख रुपये आरोपी को दिए, लेकिन कई बार कहने के बावजूद न तो भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और न ही रकम वापस की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया कि जब भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच की गई तो पता चला कि उक्त जमीन आरोपी के नाम पर नहीं थी, बल्कि अनुसूचित जाति की महिला अनीता देवी के नाम दर्ज थी। आरोप है कि शिकायतकर्ता ने इस भूमि को खरीदने के लिए बैंक से ऋण लिया था और आरोपी ने धोखे से बड़ी रकम प्राप्त कर ली।
हाई कोर्ट ने पहले दी थी अंतरिम राहत
आदेश के अनुसार, आरोपी ने पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान आरोपी ने स्वयं स्वीकार किया था कि उसने शिकायतकर्ता से 7 लाख रुपये प्राप्त किए हैं और वह यह राशि लौटाने को तैयार है। इसके आधार पर हाई कोर्ट ने उसे निर्देश दिया था कि वह अपनी सद्भावना साबित करने के लिए स्वीकार की गई राशि का 50 प्रतिशत, यानी 3.50 लाख रुपये, पांच सप्ताह के भीतर शिकायतकर्ता को अदा करे। इसी शर्त पर गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया था।
शर्त पूरी नहीं की, याचिका वापस लेकर जिला कोर्ट पहुंचे
जिला एवं सत्र कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि आरोपी ने हाई कोर्ट की शर्त का पालन नहीं किया। इसके बजाय, तय सुनवाई से पहले ही हाई कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली और जिला कोर्ट में नया आवेदन दाखिल कर दिया। इतना ही नहीं, नए आवेदन में हाई कोर्ट की पूर्व कार्यवाही और पारित आदेशों का समुचित उल्लेख भी नहीं किया गया।
कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए कहा कि कोई भी अभियुक्त अपनी सुविधा के अनुसार तथ्यों को बदलकर या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर राहत प्राप्त नहीं कर सकता।
आरोप गंभीर, राहत देने से किया इनकार
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। साथ ही उसका आचरण भी अग्रिम जमानत जैसी असाधारण राहत देने के अनुकूल नहीं है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने रोशन लाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।


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