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नैनीताल टोल टैक्स विवाद:तुगलकी फैसलों से बाज आए नगर पालिका,जनता पर फैसले थोपना बंद करे,स्थानीय लोगों पर एहसान नहीं, यह हमारा हक है:पुनीत टंडन

editor
  • Kanchan Verma
  • July 17, 2026 05:07 AM
Nainital toll tax dispute: Municipality should refrain from imposing decisions on the public, this is not a favour to the local people, it is our right: Puneet Tandon

नैनीताल। नगर पालिका नैनीताल द्वारा दोपहिया वाहनों पर टोल टैक्स लागू किए जाने को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब माँ नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने भी नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया और नई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे "तर्कहीन, बिना सोची-समझी और जनता को विश्वास में लिए बिना लिया गया फैसला" बताया है।

पुनीत टंडन ने कहा कि यदि टेंडर की शर्तों को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वे सही हैं तो उनका विरोध होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका को किसी भी बड़े फैसले से पहले स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और संबंधित पक्षों से चर्चा करनी चाहिए थी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्थानीय दोपहिया वाहनों को टोल से छूट देना नगर पालिका का कोई एहसान नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों का अधिकार है। उन्होंने कहा, "यह हमारा हक है और इसे कोई हमसे छीन नहीं सकता।"

टंडन ने सुझाव दिया कि नैनीताल के ऐसे परिवार, जिनके बच्चे बाहर पढ़ाई कर रहे हैं या नौकरी कर रहे हैं और सप्ताहांत या कुछ दिनों के अंतराल में घर आते हैं, उनके लिए एक सत्यापन आधारित फ्री पास व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनका कहना था कि एक बार दस्तावेजों का सत्यापन कर वार्षिक पास जारी किया जा सकता है और यदि आवश्यक हो तो उसके लिए नाममात्र का सत्यापन शुल्क लिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2017 से पहले पंजीकृत स्थानीय कमर्शियल टैक्सी बाइक संचालकों के लिए भी एक पेड पास प्रणाली लागू की जा सकती है, जिससे अनावश्यक विवाद समाप्त होंगे और व्यवस्था भी सुचारु रूप से चल सकेगी। वहीं, वर्ष 2017 के बाद के स्थानीय टैक्सी बाइक संचालकों के संबंध में भी तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

पुनीत टंडन ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों और कोर्ट कमेटी में हुई चर्चाओं के अनुसार शहर में टैक्सी बाइक संचालन को लेकर पहले से नियम निर्धारित हैं। ऐसे में नगर पालिका को नई व्यवस्था लागू करते समय इन सभी पहलुओं का ध्यान रखना चाहिए।

उन्होंने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में अक्सर पहले निर्णय जनता पर थोप दिए जाते हैं और विरोध शुरू होने के बाद उनमें संशोधन किया जाता है। यह तरीका उचित नहीं है।

उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) से अपील करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से बचा जाए, जो जनता में नाराजगी और टकराव का माहौल पैदा करें। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संवाद और सहमति के आधार पर ही नीतियां बनाई जानी चाहिए।


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