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नैनीताल/हल्द्वानी:जनभावनाओं और राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान के मद्देनजर हल्द्वानी ऑनलाइन 2011 फेसबुक पेज पर मुलायम सिंह यादव से जुड़ी पोस्ट पर लगाया एडमिन ने बैन!मसूरीकाण्ड और रामपुर तिराहा कांड के दोषी ठहराए गए थे सपा सुप्रीमो

editor
  • Kanchan Verma
  • October 10, 2022 11:10 AM
Nainital/Haldwani: In view of public sentiments and respect for the state agitators, Haldwani Online 2011 Facebook page's admin banned on news related to Mulayam Singh Yadav! SP supremo was guilty of Mussoorie incident and Rampur Tiraha incident

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का आज 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। देशभर में उनके निधन पर जहां शोक संवेदना प्रकट की जा रही है वही उत्तराखंड में मुलायम सिंह के निधन पर शोक व्यक्त नही किया जा रहा है बल्कि मुलायम सिंह के प्रति लोगो की नाराजगी आज फुट फुट कर बाहर आ रही है। लोग मुलायम सिंह को मसूरी कांड और रामपुर तिराहा कांड का जिम्मेदार बताते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है।
नैनीताल जिले के हल्द्वानी ऑनलाइन  2011 फेसबुक पेज के एडमिन अमित खोलिया ने जन भावनाओं को मद्देनजर रखते हुए जनता के मन की बात को तरजीह देते हुए और 2 अक्टूबर के क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए मुलायम सिंह यादव से जुड़ी कोई खबर शेयर और पोस्ट करने से मना कर दिया है और कहा है कि मुलायम सिंह यादव से जुड़ी कोई भी पोस्ट को हल्द्वानी ऑनलाइन 2011 अप्रूव नही करेगा। इतिहास में शायद ऐसा भी पहली बार हुआ है जब किसी दिग्गज नेता के निधन पर लोगो को दुःख न होकर नेता के प्रति नाराज़गी और गस्सा व्याप्त हो गया हो।

गौरतलब है कि साल 1994 में सितंबर और अक्टूबर माह में दो बड़े कांड हुए थे और तब उत्तराखंड उत्तरप्रदेश एक ही राज्य हुआ करते थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। 2 सितंबर को मसूरीकाण्ड हुआ था जिसमे 6 आंदोलनकारियों को बर्बरता पूर्वक मार दिया गया था,ये आंदोलनकारी उत्तरप्रदेश से अलग राज्य बनाने की मांग के चलते राज्य आंदोलन संघर्ष समिति का नेतृत्व कर रहे थे।मौन जुलूस निकाल रहे आंदोलनकारियों को बिना पूर्व सूचना दिए सपा सरकार के आदेशों पर गोलियों से भून दिया गया जिसमें 6 आंदोलनकारियों की मौत हुई थी। ये पहली बड़ी हिंसक घटना थी जो मुलायम सिंह यादव के राज में घटित हुई थी। इसके बाद 2 अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड की मांग करने वाले आंदोलनकारियों ने दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन करने की ठानी थी राज्य आंदोलनकारियों ने देहरादून से दिल्ली कुछ करने का निर्णय लिया था लेकिन सपा सरकार ने पहले ही इन आंदोलनकारियों के लिए फील्डिंग बैठा दी थी और किसी भी सूरत में आंदोलनकारियों को दिल्ली जाने से रोकने के आदेश दिए थे,इसके लिए राज्य आंदोलनकारियों के लिए नारसन बॉर्डर पर ही नाकाबंदी कर दी गयी। गढ़वाल और कुमाऊं के आंदोलनकारी मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर की गयी नाकाबंदी से सरकार की मंशा साफ जाहिर हो गयी थी। राज्य आंदोलनकारियों में महिलाओं, छात्रों के साथ बुजुर्ग भी शामिल थे जब उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया तो उन्होंने इसका विरोध किया और पुलिस ने उन सभी पर लाठी डंडे बरसाना शुरू कर दिया। राज्य आंदोलनकारियों ने भी बदले में पत्थर बरसाना शुरू कर दिया तो पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी कई गाड़ियों में आग लगा दी। इस घटना में 7 आंदोलनकारियों की मौत हो गयी कई घायल हो गए। इस घटना के बाद मुलायम सिंह यादव पर उत्तराखंड की जनता का गुस्सा फूट पड़ा। मसूरीकाण्ड और रामपुर तिराहा कांड मुलायम सिंह यादव से जुड़ा ऐसा कलंक है जिसे उनके मरने के बाद भी आज लोग नही भूल पाए और शोक व्यक्त करना तो दूर लोग मुलायम सिंह से जुड़ी कोई भी खबर पोस्ट तक नही करना चाहते


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