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अतीक अहमद के भाई अशरफ की हत्या के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया  संज्ञान, नोटिस जारी कर चार हफ्ते के अंदर मांगी रिपोर्ट

editor
  • Awaaz Desk
  • April 18, 2023 01:04 PM
National Human Rights Commission took cognizance in the case of the murder of Ashraf, brother of Atiq Ahmadus, issued a notice and sought a report within four weeks

नई दिल्ली. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में पुलिस हिरासत में अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और उसके भाई अशरफ की हत्या के मामले में संज्ञान लिया है. NHRC ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रयागराज पुलिस आयुक्त  को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है. वहीं माफिया अतीक अहमद की हत्या सहित कई एनकाउंटर की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले को 24 अप्रैल को सुनवाई के लिए रखा है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा ले जाने के दौरान 60 साल के अतीक अहमद और उसके अशरफ पर तीन हमलावरों ने गोलियां चला दी. इस दौरान दोनों वहां मौजूद पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे. बता दें कि इससे पहले 13 अप्रैल को झांसी में पुलिस मुठभेड़ में अतीक के बेटे असद का एनकाउंटर किया गया था. उसके अंतिम संस्कार के कुछ घंटे बाद ही अतीक और अशरफ की हत्या कर दी गई थी.

हत्या के बाद उठ रहे कई सवाल
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई. इस दौरान मौजूद उत्तर प्रदेश पुलिस के 18 जवान और अफसर मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं. पिछले कुछ साल से अपराधियों के खिलाफ लगातार सफल एनकाउंटर को अंजाम देने का दावा करने वाली यूपी पुलिस के भारी सुरक्षा बंदोबस्त को भेदते हुए तीन युवकों ने अतीक और उसके भाई को गोली मार दी. मीडिया की मौजूदगी में हुई इस घटना को लाइव देखा गया. पुलिस तीनों आरोपियों को जिंदा पकड़ने में कामयाब रही. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक खबर के मुताबिक इसके साथ ही पुलिस को कई तरह के सवालों का सामना करना पड़ा रहा है. कहा जा रहा कि मुठभेड़ों के लिए मशहूर यूपी की पुलिस फोर्स आखिर अतीक और अशरफ पर हमला करने वालों को मौके पर ही मार गिराने में नाकाम क्यों रही?


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