20 मई को देशव्यापी 'दवा बंदी': पूरे भारत में केमिस्टों की महाहड़ताल, थम सकती है दवाओं की सप्लाई
नई दिल्ली। देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी खबर है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने आगामी 20 मई को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस महाहड़ताल के कारण देश के कई हिस्सों में दवाओं की किल्लत होने और सप्लाई चेन पूरी तरह ठप होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। संगठन का आरोप है कि सरकार की ढीली नीतियों के कारण ऑनलाइन दवा बेचने वाली ई-फार्मेसी और चंद मिनटों में डिलीवरी करने वाले ऐप्स बिना किसी ठोस नियम-कायदे और निगरानी के धड़ल्ले से काम कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा है।
दवा विक्रेताओं के संगठन AIOCD की मुख्य मांग सरकार से दो विशेष नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) को तत्काल वापस लेने की है। केमिस्टों का तर्क है कि इन नियमों के चलते ई-फार्मेसी कंपनियां एक कानूनी 'ग्रे ज़ोन' (अस्पष्ट क्षेत्र) का फायदा उठा रही हैं। यह एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है, जिसे करीब आठ साल पहले ऑनलाइन फार्मेसी के रजिस्ट्रेशन और डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) की जांच के लिए लाया गया था। लेकिन सरकार ने इसे न तो कभी पूरी तरह लागू किया और न ही वापस लिया। इस अनिश्चितता का फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां बिना किसी जवाबदेही के चल रही हैं। इसे कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन उपाय के रूप में लाया गया था ताकि मरीजों को घर बैठे दवाएं मिल सकें। महासचिव राजीव सिंघल ने कहा, "महामारी बीत चुकी है, लेकिन ई-फार्मेसियां अब इस आपातकालीन नियम को एक लूपहोल (कानूनी दांव-पेच) की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। केमिस्ट एसोसिएशन ने मरीजों की सुरक्षा और व्यापारिक हितों, दोनों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। संगठन का दावा है कि कई ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स फर्जी, बिना जांचे गए या गैर-पंजीकृत डॉक्टरों के पर्चों पर भी धड़ल्ले से दवाएं बांट रहे हैं। इसके साथ ही, बड़े कॉर्पोरेट घरानों के समर्थन वाली ई-फार्मेसियों द्वारा दी जाने वाली 50 प्रतिशत से अधिक की भारी-भरकम छूट (डिस्काउंट) पर भी आपत्ति जताई गई है। राजीव सिंघल ने दोटूक कहा बड़ी कंपनियां अपनी अंधी पूंजी के दम पर बाजार को बिगाड़ रही हैं, लेकिन गली-मोहल्लों की छोटी और पारंपरिक दुकानों के लिए ऐसा करना नामुमकिन है। हम ऑनलाइन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मुकाबला बराबरी का होना चाहिए। पारंपरिक दुकानों की तरह ऑनलाइन पर भी उतनी ही सख्ती से नियम लागू हों। दवा नियामक और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ पिछले महीने हुई बैठक में केमिस्टों को केवल 'समीक्षा' का आश्वासन मिला था, जिसे संगठन ने अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मामला विचाराधीन है और कुछ राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल) के एसोसिएशन शायद इस हड़ताल में शामिल न हों, लेकिन राष्ट्रीय संघ ने इस दावे को खारिज करते हुए साफ किया है कि आंदोलन पूरे देश में एकजुटता के साथ होगा। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य नियमित दवाओं (जैसे बीपी, शुगर, दिल की बीमारी) पर निर्भर है, तो किसी भी असुविधा से बचने के लिए 20 मई से पहले ही अपनी जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक खरीदकर सुरक्षित रख लें।