एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा: बदल गया जुर्म का चेहरा! भारत में हत्या और अपहरण के मामलों में घटे, लेकिन 'डिजिटल डकैती' में 18% का उछाल
नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट ने देश में अपराध की बदलती प्रकृति की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब अपराधी सड़क पर कट्टा लहराने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे बैठकर 'डिजिटल डकैती' को अंजाम दे रहे हैं। जहां एक ओर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ होने वाले पारंपरिक अपराधों में कमी आई है, वहीं साइबर अपराध की सुनामी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
देश में पारंपरिक अपराधों में कमी आने के बावजूद साइबर अपराध तेजी से भारत की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने डिजिटल अपराधों की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देशभर में साइबर क्राइम के मामलों में 17.9 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में जहां साइबर अपराध के 86,420 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,01,928 तक पहुंच गई। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि कुल साइबर अपराधों में 72.6 प्रतिशत मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए। साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं ने देश की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल संज्ञेय अपराधों में 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में कुल 62.41 लाख अपराध दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 58.85 लाख रह गए। हत्या के मामलों में 2.4 प्रतिशत की कमी आई है। 2023 में जहां हत्या के 27,721 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 27,049 रह गई। इसी तरह अपहरण के मामलों में भी 15.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। 2023 में 1,13,564 मामलों की तुलना में 2024 में 96,079 मामले दर्ज किए गए। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी मामूली कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में महिलाओं के खिलाफ 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 4.41 लाख रह गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से होने वाले अपराध महिलाओं और बच्चों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। पारंपरिक अपराधों की जगह अब तकनीक आधारित अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम, फर्जी पुलिस कॉल, फिशिंग लिंक, क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम और म्यूल बैंक अकाउंट जैसे अपराध आम हो चुके हैं। इंटरनेट और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि साइबर अपराध दर 2023 में 6.2 थी, जो 2024 में बढ़कर 7.3 हो गई। साइबर अपराधों में धोखाधड़ी के बाद यौन शोषण और जबरन वसूली के मामले भी तेजी से सामने आए। वर्ष 2024 में 3,190 मामले यौन शोषण से जुड़े थे, जबकि 2,536 मामले जबरन वसूली के पाए गए। आर्थिक अपराधों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। 2024 में आर्थिक अपराधों के कुल 2,14,379 मामले सामने आए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें सबसे अधिक मामले जालसाजी, धोखाधड़ी और फ्रॉड यानी एफसीएफ श्रेणी के रहे। इस श्रेणी में 1,92,382 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र में साइबर अपराध के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहे। रिपोर्ट में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में भी 16.9 प्रतिशत की चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2023 में बुजुर्गों से जुड़े 27,886 मामले सामने आए थे, जो 2024 में बढ़कर 32,602 हो गए। अधिकारियों के मुताबिक इनमें बड़ी संख्या ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल स्कैम से जुड़ी थी, जहां साइबर अपराधियों ने बुजुर्गों को आसान निशाना बनाया। इसके अलावा किशोर अपराधों में भी वृद्धि हुई है। कानून तोड़ने वाले किशोरों के खिलाफ 2024 में 34,878 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 की तुलना में 11.2 प्रतिशत अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और इंटरनेट की आसान पहुंच किशोर अपराधों को प्रभावित कर रही है। साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है। गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह संस्था साइबर अपराध से निपटने के लिए 195 तकनीकी विशेषज्ञों की भर्ती कर रही है। I4C ने देश के योग्य पेशेवरों से आवेदन करने की अपील की है। आवेदन की अंतिम तिथि 19 मई तय की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अब 86 प्रतिशत से अधिक घर डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और जनजागरूकता अभियान को और मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।