नीट 2026 महा-साजिश: पीएमसीएच के 47 डॉक्टर अचानक गायब, सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड 'सम्राट' का खुला खौफनाक नेटवर्क
पटना। देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' में पेपर लीक के बाद अब एक और ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने पूरे देश के शिक्षा और चिकित्सा जगत को हिलाकर रख दिया है। बिहार की राजधानी पटना स्थित सूबे के सबसे बड़े अस्पताल और कॉलेज 'पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से इस महा-साजिश की शुरुआत होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
नीट की पुनर्परीक्षा वाले दिन पीएमसीएच के 47 एमबीबीएस और पीजी के छात्र अचानक अपने कॉलेज से रहस्यमयी ढंग से अनुपस्थित पाए गए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पीएमसीएच प्रशासन और जांच एजेंसियों के होश उड़ गए हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के कड़े निर्देशों के बावजूद, इन छात्रों का परीक्षा के दिन गायब होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि सॉल्वर गैंग की जड़ें मेडिकल कॉलेजों के भीतर कितनी गहराई तक धंस चुकी हैं। विशेष सूत्रों के मुताबिक, नीट परीक्षा में धांधली की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पहले ही सभी मेडिकल कॉलेजों को परीक्षा के दिन छात्रों की शत-प्रतिशत डिजिटल उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद, पीएमसीएच के 47 छात्र निर्धारित समय पर कॉलेज से नदारद मिले। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 37 छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने गायब होने से पहले कॉलेज प्रशासन को कोई पूर्व सूचना या प्रार्थना पत्र तक नहीं दिया था। मामले की गंभीरता और देशव्यापी संवेदनशीलता को देखते हुए पीएमसीएच प्रशासन ने आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी है। बिना सूचना गायब रहने वाले सभी छात्रों को 24 घंटे के भीतर पुख्ता दस्तावेजों के साथ स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम जारी किया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन सभी के खिलाफ एफआईआर और निलंबन की कार्रवाई तय है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस रैकेट के जाली तौर-तरीके सामने आ रहे हैं। पूर्व में लखीसराय से गिरफ्तार किए गए पीएमसीएच के जिस एमबीबीएस छात्र को मयंक कश्यप समझा जा रहा था, उसका असली नाम अश्विनी कुमार सामने आया है। अश्विनी पर आरोप है कि उसने लखीसराय के परीक्षा केंद्र पर 'मुन्नाभाई' (सॉल्वर) की भूमिका निभाने के लिए अपने कॉलेज में एक घिनौनी साजिश रची थी। उसने कॉलेज के अटेंडेंस रजिस्टर और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड में खुद को उपस्थित दिखाने के लिए अपने ही एक सहपाठी (मित्र) की मदद ली थी, ताकि कागजों पर वह कॉलेज में दिखे, जबकि असलियत में वह सॉल्वर गैंग के काम से लखीसराय पहुंच चुका था।
जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि गिरफ्तार आरोपी अश्विनी कुमार इस पूरे सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड रविशंकर उर्फ 'सम्राट' का सबसे खास और करीबी गुर्गा है। अश्विनी लगातार पटना में सम्राट के संपर्क में था और उसी के इशारे पर कड़ियां जोड़ रहा था। सॉल्वर गैंग का यह मास्टरमाइंड रविशंकर उर्फ सम्राट खुद नालंदा स्थित 'भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' में एमबीबीएस फोर्थ ईयर (चतुर्थ वर्ष) का छात्र है और फिलहाल पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा है। पुलिस के अनुसार, सम्राट ने ही लखीसराय के तीन प्रमुख परीक्षा केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह बैठने के लिए 9 शातिर मेडिकल छात्रों की पूरी फौज तैयार की थी। इस पूरे सिंडिकेट के पास आ रहे करोड़ों रुपये के काले धन को देखते हुए बिहार सरकार ने इसकी विस्तृत जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दी है। ईओयू की टीमें अब इस गिरोह के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स, गुप्त ठिकानों और बड़े आर्थिक लेन-देन को खंगालने में जुटी हैं। गौरतलब है कि पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद बीते 21 जून को बिहार के 35 शहरों सहित पूरे देश में नीट की पुनर्परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित की गई थी। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के त्रि-स्तरीय कड़े इंतजाम किए थे। लेकिन इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए सॉल्वर गैंग ने पेपर लीक से भी बड़ी साजिश रची थी। ईओयू की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग का नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार गया, पटना, लखीसराय के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के नामी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हैं। ये शातिर अपराधी परीक्षा कराने वाली बायोमेट्रिक कंपनी के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मदद से असली परीक्षार्थी के अंगूठे के निशान और डेटा में हेरफेर कर सॉल्वरों को सीधे परीक्षा हॉल में बैठाने की फिराक में थे। इसके लिए प्रति छात्र 38 से 40 लाख रुपये की भारी-भरकम डील तय हुई थी। फिलहाल पुलिस ने 30 लोगों को दबोच लिया है और मास्टरमाइंड सम्राट की गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।