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नीट पेपर लीक: अब छात्रों के समर्थन में उतरे देश के किसान, पीएम मोदी को पत्र लिख कहा-लाठी नहीं, बातचीत से निकालें हल 

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 24, 2026 09:07 AM
NEET Paper Leak: Farmers across the country have now come out in support of the students; in a letter to PM Modi, they urged him to find a solution through dialogue rather than lathi-charges.

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन को अब किसान संगठनों का भी खुला समर्थन मिल गया है। विभिन्न किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बल प्रयोग के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और अब परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है। पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई, दोषियों की जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा गड़बड़ियों से न केवल उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि भर्ती और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है। इसी आंदोलन के समर्थन में आगे आए किसान संगठनों ने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। उनका मानना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश के युवाओं का भरोसा परीक्षा व्यवस्था से उठा दिया है और इस पर तत्काल ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानों का पूरा समर्थन आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ता है। इसलिए सरकार को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। हालांकि उन्होंने छात्रों से यह भी अपील की कि वे अपने आंदोलन को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएं।वहीं संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि छात्र आंदोलन ने सरकार के सामने युवाओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उजागर कर दिए हैं। उनके अनुसार, यह आंदोलन केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में किसान संगठनों ने कहा कि आज देश के युवा सड़कों पर इसलिए हैं क्योंकि उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और उनके परिवार अपनी जमा-पूंजी उनकी पढ़ाई पर खर्च करते हैं। लेकिन जब कोई परीक्षा पेपर लीक हो जाता है या भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर जाती है, तो केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों सपने टूट जाते हैं। पत्र में किसानों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि देश की प्रतिभा के साथ अन्याय है। किसान संगठनों ने सरकार से पूछा कि पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी व्यवस्था क्या बनाई जा रही है? ऐसे संगठित गिरोहों और उनके संरक्षण देने वालों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई हुई है? परीक्षा रद्द होने से छात्रों के समय, धन और मानसिक पीड़ा की भरपाई के लिए क्या नीति बनाई जाएगी? साथ ही भर्ती और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए सरकार की समयबद्ध योजना क्या है? पत्र में यह भी कहा गया कि यदि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं तो उनका जवाब लाठीचार्ज या बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और समाधान से दिया जाना चाहिए।लोकतंत्र की ताकत विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि असहमति को सुनने और समस्याओं का समाधान निकालने में होती है। किसानों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे छात्र प्रतिनिधियों से जल्द बातचीत करें, पेपर लीक के दोषियों पर बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें और ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित करें जिस पर देश का हर छात्र भरोसा कर सके। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को लेकर आंदोलन तेज किया है। ऐसे समय में किसान संगठनों का समर्थन मिलने से यह आंदोलन और व्यापक होता दिखाई दे रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छात्रों और किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या संवाद के जरिए इस विवाद का समाधान निकल पाता है।


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