नीट-यूजी 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा में बेटियों का दबदबा,58% से अधिक छात्राओं ने मारी बाजी, जानें नतीजों से जुड़ी हर बड़ी बात
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष के नतीजों में एक बार फिर देश की बेटियों ने अपनी मेधा का परचम लहराया है। कुल सफल उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक संख्या छात्राओं की है, जो महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के क्षेत्र में उनके बढ़ते कदमों की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। परिणामों के समय पर जारी होने से अब देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबद्ध पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया बिना किसी देरी के समय पर शुरू हो सकेगी। इस साल परीक्षा में देश-विदेश के केंद्रों से करीब 20 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। परीक्षा में शामिल हुई कुल छात्राओं में से 56.8 प्रतिशत सफल रहीं। वहीं, लड़कों (पुरुष उम्मीदवारों) का सफलता प्रतिशत 55.1 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस बार की नीट परीक्षा में पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। इस परीक्षा के टॉपर्स की सूची में कुछ बेहद दिलचस्प और सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। देश के टॉप-138 रैंक हासिल करने वाले छात्रों में से 93 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने पहली ही बार में नीट की परीक्षा पास की है। कुल टॉप स्कोरर्स में से 99 प्रतिशत की उम्र महज 17 से 19 वर्ष के बीच है।
अंकों के आधार पर प्रदर्शन का पूरा गणित
अंक सीमा सफल उम्मीदवारों की कुल संख्या
700 से अधिक अंक 19 उम्मीदवार
690 से अधिक अंक 138 उम्मीदवार
650 या उससे अधिक 1,492 उम्मीदवार
600 या उससे अधिक 10,160 उम्मीदवार
500 या उससे अधिक 90,780 उम्मीदवार
देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के छात्रों ने इस परीक्षा में सफलता का स्वाद चखा है। उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.7 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जबकि सुदूर लक्षद्वीप से भी 43 उम्मीदवारों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रचा है। शीर्ष रैंक हासिल करने वाले 138 छात्र देश के 66 अलग-अलग छोटे-बड़े शहरों से ताल्लुक रखते हैं, जो यह साबित करता है कि अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सफलता देश के महानगरों तक ही सीमित नहीं रह गई है। इस वर्ष यह परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया और असमिया सहित कुल 13 भाषाओं में देश के 551 और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उसकी भूमिका केवल परीक्षा आयोजित करने और रैंक जारी करने तक सीमित है। ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी करेगी। इसके साथ ही, एनटीए ने अभ्यर्थियों को सचेत किया है कि वे मेडिकल सीट दिलाने या अंक बढ़ाने का दावा करने वाले किसी भी प्रकार के फर्जी कॉल, संदेश या अनधिकृत वेबसाइटों के बहकावे में न आएं।