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चारधाम यात्रा में बना नया रिकॉर्ड: पहली बार आने वाले भक्तों से गुलजार हुए धाम,अध्ययन में बड़ा खुलासा

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 11, 2026 12:06 PM
New record set for Char Dham Yatra: Shrines abuzz with first-time pilgrims; study reveals major findings.

देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा और सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब को लेकर एक बेहद दिलचस्प और सुखद रिपोर्ट सामने आई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा वर्ष-2025 में धामों की धारण क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) को लेकर किए गए एक विस्तृत अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि इन पवित्र धामों में पहली बार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रही है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश-दुनिया में चारधाम यात्रा के प्रति युवाओं और नए श्रद्धालुओं का आकर्षण रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है।

अध्ययन के अनुसार, पवित्र हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा यानी 89 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जो जीवन में पहली बार वहां मत्था टेकने पहुंचे थे। वहीं, अन्य धामों का गणित भी कुछ ऐसा ही रहा। यहां रिकॉर्ड 81 प्रतिशत भक्तों ने अपनी पहली हाजिरी लगाई। बाबा के दर पर पहुंचे 79 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पहली बार आए हैं। यमुना मैया के दर्शन करने वाले करीब 70 प्रतिशत लोग पहली बार पहुंचे थे। रिपोर्ट में इस बात का भी बारीकी से विश्लेषण किया गया है कि श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए किस परिवहन माध्यम को सबसे ज्यादा चुना। यहाँ सबसे ज्यादा 41% लोगों ने निजी टैक्सी या बस का सहारा लिया, जबकि 34% ने सरकारी/सार्वजनिक परिवहन और 6% ने दोपहिया वाहनों से सफर तय किया। यहाँ भी 61% श्रद्धालुओं ने निजी टैक्सी या बसों को प्राथमिकता दी। 19% निजी कार और 9% बाइक से पहुंचे। यहाँ अधिकांश यात्रियों ने सार्वजनिक परिवहन (बसों) पर भरोसा जताया, जबकि 12% लोग दोपहिया वाहनों से पहुंचे।केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में करीब 7% तथा गंगोत्री और यमुनोत्री में 3% भाग्यशाली भक्तों ने हवाई मार्ग (हेलीकॉप्टर) का लाभ उठाया। अध्ययन में यह भी पाया गया कि अधिकांश यात्रियों ने ठहरने के लिए होटल या होमस्टे को अपनी पहली पसंद बनाया। हालांकि, केदारनाथ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वहां सबसे अधिक 18 प्रतिशत लोगों ने टेंट या कैंपिंग में रातों को बिताना पसंद किया। इसके विपरीत, यमुनोत्री धाम में पारंपरिक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता मिली, जहां सबसे अधिक 10 प्रतिशत श्रद्धालु धर्मशालाओं में ठहरे। इस व्यापक अध्ययन से साफ है कि बुनियादी सुविधाओं में सुधार के कारण अब नए यात्रियों के लिए उत्तराखंड के दुर्गम तीर्थस्थलों की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुलभ और आकर्षक हो गई है।


 


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