उत्तराखंड में स्कूलों की नई समय-सारिणी जारी! ऋतुवार शेड्यूल लागू, अब मौसम के हिसाब से खुलेंगे स्कूल
उत्तराखंड शासन ने राज्य के शिक्षा ढांचे को और अधिक सुव्यवस्थित और छात्र-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन ने प्रदेश के समस्त राजकीय एवं निजी प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के लिए नई समय-सारिणी का संशोधित आदेश जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी और पूरे शैक्षणिक सत्र (31 मार्च तक) लागू रहेगी। विशेष बात यह है कि शासन ने पिछले 6 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए इसे और अधिक व्यावहारिक बनाया है, ताकि छात्रों को बदलते मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण परेशानी न हो।
उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए शासन ने इस आदेश में एक अति महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा है। यदि किसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में मौसम, बर्फबारी या परिवहन की गंभीर समस्या है, तो वहां की समय-सारिणी में स्थानीय स्तर पर बदलाव किया जा सकेगा। शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। उत्तराखंड शासन ने राज्य के सभी राजकीय और निजी स्कूलों के लिए नई ‘ऋतुवार’ समय-सारिणी लागू कर दी है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है और पूरे शैक्षणिक सत्र 31 मार्च तक लागू रहेगी। इस कदम का उद्देश्य छात्रों को मौसम के अनुसार बेहतर और सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है। नई समय-सारिणी के तहत स्कूलों को दो हिस्सों ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन सत्र में विभाजित किया गया है। ग्रीष्मकाल (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के दौरान स्कूल सुबह जल्दी खुलेंगे। इस अवधि में प्रार्थना सभा सुबह 7:15 से 7:30 बजे तक होगी और छुट्टी दोपहर 1:00 बजे कर दी जाएगी। इसका मकसद बच्चों को तेज गर्मी और दोपहर की चिलचिलाती धूप से बचाना है। वहीं, शीतकाल (1 अक्टूबर से 31 मार्च) में ठंड और कोहरे को देखते हुए स्कूल देर से शुरू होंगे। इस दौरान प्रार्थना सभा सुबह 8:45 से 9:00 बजे तक होगी और छुट्टी दोपहर 3:10 बजे होगी। इससे छात्रों को कड़ाके की ठंड में सुबह जल्दी स्कूल जाने से राहत मिलेगी। उत्तराखंड की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष लचीलापन भी दिया है। यदि किसी दुर्गम क्षेत्र में बर्फबारी, मौसम या परिवहन से जुड़ी समस्याएं आती हैं, तो स्थानीय स्तर पर स्कूल समय में बदलाव किया जा सकेगा। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेगी। हालांकि शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय बदलने के बावजूद पढ़ाई के कुल घंटों में कोई कटौती नहीं होगी। सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे। इस नई व्यवस्था से राज्यभर में स्कूल टाइमिंग को लेकर एकरूपता आएगी। अब तक अलग-अलग जिलों और निजी स्कूलों में समय को लेकर काफी भिन्नता थी, जिससे अभिभावकों और विभाग को परेशानी होती थी। नए आदेश से पारदर्शिता और अनुशासन दोनों बढ़ेंगे। शासन ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस समय-सारिणी का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर आवश्यक कार्रवाई करें।