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न वर्दी, न सरकारी जिम्मेदारी, फिर भी बन गए रक्षक: दिल्ली अग्निकांड में मुस्लिम युवाओं ने अपनी सांसें दांव पर लगाकर बचाईं अनजान लोगों की जान, सामने आई इंसानियत की प्रेरक दास्तान

editor
  • Awaaz Desk
  • June 04, 2026 01:06 PM
No uniform, no government responsibility, yet they became protectors: Muslim youth risked their own lives to save strangers during the Delhi fire, an inspiring tale of humanity.

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित पांच मंजिला ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल में बुधवार को हुए भीषण अग्निकाण्ड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल होकर अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। लेकिन इस त्रासदी के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आए, जिन्होंने मानवता, साहस और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। जब होटल के भीतर फंसे लोग धुएं और आग की लपटों से बचने के लिए खिड़कियों से नीचे कूदने को मजबूर थे, तब स्थानीय निवासी मोहम्मद अफजल, वसीम राजा, रियाजुद्दीन मंसूरी, अरमान मंसूरी और कई अन्य युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। उस समय तक न तो दमकल विभाग मौके पर पहुंचा था और न ही कोई विशेष बचाव उपकरण उपलब्ध था, लेकिन इन लोगों ने हालात को देखते हुए तत्काल निर्णय लिए और कई लोगों के लिए जीवन और मृत्यु के बीच ढाल बनकर खड़े हो गए। 

स्थानीय निवासी मोहम्मद अफजल ने बताया कि जैसे ही उन्हें आग लगने की सूचना मिली, वह अपने भाई के साथ मौके पर पहुंचे। तब तक आग पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले चुकी थी और ऊपर फंसे लोग मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे। हालात की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने सड़क के दूसरी ओर स्थित एक गद्दे की दुकान से गद्दे निकालकर होटल के नीचे बिछाने शुरू कर दिए। उनका मकसद था कि यदि लोग खिड़कियों से नीचे कूदें तो उनकी जान बचाई जा सके। अफजल ने बताया कि उन्होंने ऊपर फंसे लोगों को लगातार हिम्मत बंधाई और नीचे कूदने के लिए प्रेरित किया। कई लोगों ने साहस दिखाते हुए छलांग लगाई और गद्दों पर गिरकर सुरक्षित बच गए। हालांकि कुछ लोग भय और घबराहट के कारण आखिरी समय तक कूदने का साहस नहीं जुटा सके। इस दौरान स्थानीय हाजी साहब ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद राहत और बचाव अभियान ने गति पकड़ी। जब तक दमकल विभाग मौके पर पहुंचता, तब तक स्थानीय लोग अपने स्तर पर दर्जनों लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशों में जुटे रहे।

मानवता की सबसे बड़ी मिसाल उस समय देखने को मिली जब गद्दे की दुकान के मालिक रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पूरी दुकान खाली कर दी। उन्होंने दुकान में रखे सभी गद्दे निकालकर होटल के नीचे बिछा दिए। उस समय उनके सामने कारोबार का नुकसान नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाना सबसे बड़ा उद्देश्य था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देशभर में वायरल हुए जिन वीडियो में लोग होटल की खिड़कियों से नीचे कूदते दिखाई दिए, उनमें से कई लोग सिर्फ इसलिए बच पाए क्योंकि नीचे गद्दों की व्यवस्था मौजूद थी। यदि यह व्यवस्था नहीं होती, तो मृतकों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने केवल गद्दों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। बचाव उपकरणों की कमी के कारण अरमान की दुकान से बेडशीट और चादरें भी निकाली गईं। इन चादरों की मदद से कई घायल लोगों को ऊपरी मंजिलों से नीचे उतारा गया। बाद में इन्हीं चादरों में लपेटकर पीड़ितों को एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया।

बचाव कार्य में एक और महत्वपूर्ण भूमिका वसीम राजा ने निभाई। मैक्स अस्पताल में कार्यरत वसीम राजा ने बताया कि उनकी मेडिकल ट्रेनिंग इस आपदा के दौरान काफी काम आई। उन्होंने धुएं के कारण बेहोश हो चुके कई लोगों को प्राथमिक चिकित्सा दी और अस्पताल पहुंचाने के दौरान लगातार सीपीआर करते रहे। वसीम राजा के अनुसार अधिकांश पीड़ित आग से झुलसे नहीं थे, बल्कि जहरीले धुएं के कारण बेहोश हो गए थे। कई लोगों की सांसें रुकने लगी थीं और चेहरे पूरी तरह काले पड़ चुके थे। ऐसे में उन्होंने बिना किसी औपचारिकता और बिना समय गंवाए कई लोगों को माउथ-टू-माउथ रेस्पिरेशन दिया। उनके मुताबिक कुछ लोगों की जान इन्हीं प्रयासों के कारण बच सकी।
हौज रानी क्षेत्र के एक अन्य युवक, जिन्हें फायर फाइटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त है और जो मैक्स अस्पताल से जुड़े हैं, सुबह करीब 8ः45 बजे मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी भीड़ के बीच रास्ता बनाते हुए दमकल कर्मियों के साथ इमारत के अंदर प्रवेश किया और कई लोगों को बाहर निकालने में मदद की।

बचावकर्मियों के अनुसार होटल में ठहरे अधिकांश लोग विदेशी नागरिक थे। आग और धुएं के कारण होटल के भीतर अफरा.तफरी का माहौल था। कई लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें कुछ की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि कई अन्य को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। इस भयावह अग्निकांड ने जहां सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में आम नागरिक किस तरह असाधारण साहस का परिचय दे सकते हैं। मोहम्मद अफजल, वसीम राजा, रियाजुद्दीन मंसूरी, अरमान मंसूरी और उनके साथियों ने यह दिखा दिया कि इंसानियत किसी पद, वर्दी या पहचान की मोहताज नहीं होती। आग की उस भयावह त्रासदी के बीच इन लोगों ने जो साहस, संवेदनशीलता और सेवा भावना दिखाई, वह उन परिवारों के लिए हमेशा उम्मीद की किरण बनी रहेगी, जिनके अपने आज भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।


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