NEET ही नहीं, हर परीक्षा होगी सुरक्षित!तकनीक और कड़ी जवाबदेही से ही निकल सकता है स्थायी समाधान,लिंक में दिए सुझाव बदल सकते हैं भारत का पूरा एग्जाम सिस्टम
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा अब एक राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। कभी NEET परीक्षा में धांधली के आरोप लगते हैं तो कभी किसी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आती है। हर घटना के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं, गिरफ्तारियां भी होती हैं, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही है।
इसी बीच दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। यह आंदोलन कितना सफल होगा, इसका जवाब भविष्य देगा, लेकिन एक सवाल लगातार बना हुआ है कि वर्षों से सामने आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान क्या है? वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कुछ ऐसे तकनीकी उपाय हो सकते हैं जो अगर लागू किए जाएं तो पेपर लीक की घटनाओं में निश्चित रूप से कमी लाई जा सकती है।
सबसे पहला सुझाव यह है कि प्रश्नपत्रों को पहले से प्रिंट कर राज्यों और परीक्षा केंद्रों तक भेजने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाए। इसके बजाय प्रश्नपत्र पूरी तरह एन्क्रिप्टेड (Encrypted) रूप में सुरक्षित सर्वर पर रखा जाए और परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले अधिकृत डिजिटल सिस्टम के माध्यम से परीक्षा केंद्र पर ही डिक्रिप्ट (Decrypt) कर तत्काल प्रिंट किया जाए। इससे परिवहन और भंडारण के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका काफी हद तक समाप्त हो सकती है। यदि इसके लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधन और आधुनिक प्रिंटिंग व्यवस्था विकसित करनी पड़े, तो भी यह लाखों विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश होगा।
दूसरा महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र के लिए अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट तैयार किए जाएं। प्रश्नों का क्रम और विकल्प भी अलग हों। डिजिटल इंडिया की अवधारणा के अनुरूप AI आधारित सुरक्षित प्रश्न बैंक विकसित किया जाए, जहां से परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले स्वचालित रूप से प्रश्नपत्र तैयार हो। इससे पहले से किसी के पास पूरा प्रश्नपत्र पहुंचने की संभावना कम हो जाएगी।
तीसरे सुझाव में Zero Trust Security Model लागू किया जा सकता है, जिसमें किसी एक अधिकारी या व्यक्ति के पास पूरी प्रक्रिया का नियंत्रण न हो। इसके साथ ही Blockchain आधारित लॉगिंग की व्यवस्था हो, ताकि यह रिकॉर्ड सुरक्षित रहे कि किसने, कब और किस सिस्टम से प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई।
चौथे सुझाव के तहत Multi-Factor Authentication अनिवार्य किया जाए, ताकि बहुस्तरीय सत्यापन के बिना कोई भी अधिकारी प्रश्नपत्र तक पहुंच न बना सके। साथ ही Geo-fencing तकनीक लागू की जाए, जिससे प्रश्नपत्र केवल अधिकृत परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर पर ही निर्धारित समय पर खुल सके।
पांचवा सुझाव है कि प्रत्येक प्रश्नपत्र पर डिजिटल वॉटरमार्क हो, जिससे यदि कहीं से प्रश्नपत्र लीक होता है तो तुरंत यह पता लगाया जा सके कि वह किस परीक्षा केंद्र या किस सिस्टम से बाहर आया। इसके अलावा संवेदनशील परीक्षाओं में Computer Based Test (CBT) का दायरा लगातार बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें प्रश्नपत्र के भौतिक रूप से बाहर आने की संभावना बेहद कम हो जाती है।
अगर एन्क्रिप्टेड डिजिटल डिलीवरी, अंतिम समय में डिक्रिप्शन, AI आधारित प्रश्न चयन, अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट, डिजिटल वॉटरमार्किंग और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ लागू किया जाए तो पेपर लीक जैसी घटनाओं में बड़ी कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से शीघ्र सुनवाई और कठोर सजा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।
देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। ऐसे में केवल पेपर लीक के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना ही न्यूनतम रह जाए।
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