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पलामू में नशा माफियाओं पर 'ऑपरेशन प्रहार': 10 साल का क्राइम डेटा खंगाल रही पुलिस, टारगेट पर छोटे-बड़े सौदागर

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 05, 2026 11:07 AM
'Operation Prahar' against drug mafias in Palamu: Police scrutinizing 10 years of crime data; dealers—both big and small—in the crosshairs.

पलामू। झारखंड के पलामू जिले को नशामुक्त बनाने और युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले नशीले पदार्थों के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पलामू पुलिस ने एक बेहद आक्रामक अभियान शुरू किया है। 'ऑपरेशन प्रहार' नाम के इस महाअभियान के तहत पुलिस ने जिले के तमाम छोटे-बड़े नशा तस्करों को अपने रडार पर ले लिया है। पलामू पुलिस इस वक्त जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों के दौरान नारकोटिक्स से जुड़े दर्ज मुकदमों के डेटा को खंगाल रही है।

इस हाई-लेवल ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य उन सभी अपराधियों का भौतिक सत्यापन करना है जो अतीत में ड्रग्स और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल रहे हैं। पुलिस बारीकी से यह जांच कर रही है कि जेल से बाहर आने के बाद ये आरोपी वर्तमान में क्या कर रहे हैं—क्या वे सुधर चुके हैं या फिर से परदे के पीछे से मौत का यह काला कारोबार चला रहे हैं। ऑपरेशन प्रहार' के जमीन पर उतरते ही पलामू पुलिस को शुरुआती तीन दिनों के भीतर ही बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की विशेष टीमों ने पाटन, टाउन और चैनपुर थाना क्षेत्रों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध गांजा और हेरोइन की खेप जब्त की है। इस अभियान के तहत पुलिस ने केवल बड़े तस्करों पर ही नहीं, बल्कि आम जनता और युवाओं के बीच सीधे तौर पर नशीले पदार्थ पहुंचाने वाले छोटे कारोबारियों (लोकल पेडलर्स) को भी अपना मुख्य टारगेट बनाया है। ये छोटे शातिर अपराधी आम लोगों के बीच घुल-मिलकर रहते हैं और पुलिस की नजरों से बचकर गली-मुहल्लों में ड्रग्स सप्लाई करते हैं। पलामू पुलिस ने जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों जैसे मेदिनीनगर, चैनपुर, हुसैनाबाद और छतरपुर समेत कई हॉटस्पॉट इलाकों को पूरी तरह से चिन्हित कर लिया है। पुलिस ने इन क्षेत्रों में सक्रिय छोटे नशा कारोबारियों की एक अलग 'सीक्रेट लिस्ट' तैयार की है। खुफिया तंत्र के जरिए उनके काम करने के तौर-तरीकों, उनके ठिकानों और उनके ग्राहकों (सप्लायर चेन) के बारे में पुख्ता जानकारियां इकट्ठा की जा चुकी हैं, जिससे कभी भी उन पर शिकंजा कसा जा सके। पलामू पुलिस के अनुसंधान में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि जिले में नशे के काले कारोबार का नेटवर्क पड़ोसी जिले गढ़वा और बिहार के सासाराम से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। अक्सर बिहार के सासाराम इलाके से ही पलामू में ब्राउन शुगर, अफीम और खतरनाक हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाई जाती है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में पुलिस ने भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाएं और कफ सिरप भी बरामद किए हैं। पुलिस ने सासाराम-गढ़वा-पलामू के इस त्रिकोणीय ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अंतर-राज्यीय स्तर पर जाल बिछा दिया है। मामले की गंभीरता और अभियान की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए पलामू के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कपिल चौधरी ने बताया कि जिले के सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत कड़े टास्क और टारगेट सौंपे गए हैं। सभी थानों को बिना किसी ढिलाई के त्वरित कार्रवाई करने का सख्त निर्देश दिया गया है। एसपी कपिल चौधरी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "पलामू पुलिस नशीले पदार्थों के कारोबार को लेकर पूरी तरह से 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। चाहे कोई बड़ा सिंडिकेट हो या गली-मुहल्ले में नशा बेचने वाला छोटा कारोबारी, समाज को खोखला करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा। हमारी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।


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