एईडीओ से हवलदार भर्ती तक फैला पेपर लीक नेटवर्क! पुराने सुराग से ईओयू की बड़ी कार्रवाई, बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत 3 गिरफ्तार
पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का नेटवर्क लगातार गहराता जा रहा है। अप्रैल में आयोजित एईडीओ (असिस्टेंट एजुकेशन डेवलपमेंट ऑफिसर) परीक्षा में सामने आए कदाचार मामले की जांच ने अब हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक का बड़ा खुलासा कर दिया है। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इस मामले में बायोमीट्रिक सुपरवाइजर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराता था, फिर परीक्षा केंद्र के भीतर अभ्यर्थियों तक उन्हें पहुंचाने की साजिश रचता था।
ईओयू के अनुसार, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा 29 जुलाई 2026 को आयोजित गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग के अधिनायक अनुदेशक (हवलदार अनुदेशक) भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की साजिश रची गई थी। गिरफ्तार आरोपियों में पटना निवासी राज समदर्शी उर्फ राजा (25), वैशाली निवासी अभिषेक कुमार (21) और परीक्षा केंद्र पर तैनात बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार (28) शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है। जांच एजेंसी ने बताया कि इस कार्रवाई की शुरुआत अप्रैल 2026 में आयोजित बिहार लोक सेवा आयोग की एईडीओ परीक्षा से हुई थी। उस परीक्षा के दौरान भोजपुर निवासी एक अभ्यर्थी को पहले से तैयार उत्तरों के साथ नकल करते पकड़ा गया था। उसी मामले की जांच के दौरान ईओयू को सूचना मिली कि इस गिरोह से जुड़ा राज समदर्शी हाजीपुर केंद्र पर हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाला है। इसके बाद उसे परीक्षा केंद्र के बाहर से हिरासत में लिया गया। पूछताछ में राज समदर्शी ने अपने सहयोगी अभिषेक कुमार और बायोमीट्रिक सुपरवाइजर नितेश कुमार की भूमिका का खुलासा किया। जांच के दौरान दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की तलाशी लेने पर कई अहम डिजिटल सबूत मिले। इनमें विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, उत्तर-पत्र और परीक्षा से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। सबसे अहम तथ्य यह सामने आया कि हवलदार अनुदेशक परीक्षा के दिन 29 जुलाई को दोपहर 12:21 बजे उत्तर-पत्र मोबाइल के जरिए भेजे गए थे। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की पूरी साजिश पहले से तैयार थी। ईओयू का कहना है कि बायोमीट्रिक सुपरवाइजर की भूमिका इस नेटवर्क में बेहद महत्वपूर्ण थी। आरोप है कि परीक्षा केंद्र के भीतर तकनीकी व्यवस्था का लाभ उठाकर अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, समय रहते मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई से इस साजिश का पर्दाफाश हो गया। आर्थिक अपराध थाना में बिहार लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम-2024 की धारा 10/11(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों की निशानदेही पर चार अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है, जिनकी तलाश जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है। ईओयू अब आरोपियों के मोबाइल डेटा, बैंक लेन-देन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।