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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: पीएम मोदी ने बंटवारे के पीड़ितों को किया नमन,बोले-शून्य से फिर रची कामयाबी की नई गाथा

editor
  • Tapas Vishwas
  • August 14, 2026 07:08 AM
Partition Horrors Remembrance Day: PM Modi pays tribute to the victims of Partition, says a new saga of success was scripted anew from scratch.

नई दिल्ली। देश के स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को भारत ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाते हुए 1947 के बंटवारे के अनगिनत पीड़ितों, शहीदों और विस्थापितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की आजादी के साथ मिले इस सबसे बड़े दर्द को याद करते हुए बंटवारे से प्रभावित करोड़ों लोगों के अदम्य साहस, संयम और हिम्मत को नमन किया।

आजादी की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि विभाजन का दौर ऐसी त्रासदी थी, जिसने असंख्य जिंदगियों को तहस-नहस कर दिया, परिवारों को उजाड़ दिया और लोगों को अपनों से बिछड़ने का असहनीय दर्द दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस और संघर्ष को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात में लाखों लोगों ने अपनों और अपनी पुश्तैनी जमीन को खोने के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की और कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत में बदल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी के बाद विस्थापित हुए लोगों ने जिस हौसले के साथ नई जिंदगी शुरू की, वह मानव जज्बे की ताकत का उदाहरण है। इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बावजूद देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना केवल इतिहास के एक दुखद अध्याय को याद करना नहीं है, बल्कि उन लोगों के संघर्ष और संकल्प को सम्मान देना भी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को फिर से खड़ा किया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में देश में भाईचारे और एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का संकल्प देशवासियों को एकजुट रहने और मिलकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस देशवासियों के लिए गर्व और उत्साह का अवसर होता है, लेकिन आजादी के साथ देश के विभाजन की भयावह त्रासदी भी जुड़ी थी। भारत और पाकिस्तान के गठन के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई और लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापन और हिंसा की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को याद करना है। यह दिन उन लोगों के संघर्ष, त्याग और साहस को सम्मान देने का अवसर भी है। 1947 का विभाजन मानव इतिहास के सबसे बड़े विस्थापनों में से एक माना जाता है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार करीब दो करोड़ लोग इससे प्रभावित हुए। लाखों परिवारों को अपने पुश्तैनी गांव, शहर और संपत्ति छोड़कर नए स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। कई परिवारों ने इस दौरान अपने प्रियजनों को खो दिया। विभाजन की त्रासदी ने लोगों के जीवन पर गहरे सामाजिक और मानवीय प्रभाव छोड़े। विस्थापित परिवारों को अनजान जगहों पर नई शुरुआत करनी पड़ी। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने धीरे-धीरे अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित किया और देश के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश ऐसे समय आया है जब देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है। उन्होंने विभाजन की पीड़ा को याद करते हुए एकता, भाईचारे और राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया।


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