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गौलापार में उत्तराखंड हाईकोर्ट निर्माण का रास्ता साफ! सुप्रीम कोर्ट ने जनमत संग्रह का आदेश किया निरस्त, हल्द्वानी में चिन्हित भूमि पर नए परिसर की प्रक्रिया तेज करने के दिए निर्देश

editor
  • Awaaz Desk
  • July 15, 2026 01:07 PM
Path cleared for the construction of the Uttarakhand High Court in Gaulapar! The Supreme Court has set aside the order for a referendum and directed that the process for the new complex on the identified land in Haldwani be expedited.

नैनीताल। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करने के मामले में एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के 4 मई 2024 के आदेश को पूरी तरह से रद्द (सेट असाइड) कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के लिए एक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक स्तर पर इस तरह के जनमत संग्रह के आदेश पारित करना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रुख पर कड़ी असहमति जताई। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट का न्यायिक पक्ष पर इस तरह के आदेश पारित करने से कोई सरोकार या लेना-देना नहीं होना चाहिए। अदालत का काम जनमत संग्रह कराना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को खारिज करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और स्थान परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने का एक तय प्रशासनिक तरीका होता है। यह आदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश ऋतु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने जारी किया था।

हाईकोर्ट ने तब गौलापार में चिन्हित की गई भूमि को हाईकोर्ट के लिए अनुपयुक्त ठहराया था। ​सुप्रीम कोर्ट ने इस जटिल मामले का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए निर्देश दिया है कि अब इस पूरे विवाद को प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जाए। न्यायालय ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट को अपने प्रशासनिक पक्ष पर राज्य सरकार के साथ आपसी समन्वय और परामर्श करना चाहिए। हाईकोर्ट और राज्य सरकार मिलकर बैठें और अदालत परिसर से जुड़े सभी ढांचागत (इन्फ्रास्ट्रक्चरल) मुद्दों और समस्याओं का एक ठोस समाधान तैयार करें। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि उत्तराखंड सरकार ने पहले ही हाईकोर्ट के नए भवन निर्माण के लिए जिला हल्द्वानी में एक उपयुक्त भूमि को चिन्हित (इयरमार्क) कर लिया है। इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तेजी लाने के आदेश दिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि हल्द्वानी में चिन्हित की गई इस जमीन से जुड़ी सभी आवश्यक मंजूरियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (क्लियरेंस) आगामी 6 सप्ताह के भीतर पूरे कर लिए जाएं। ​यह पूरा मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था जब हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने नैनीताल हाईकोर्ट के जनमत संग्रह कराने के फैसले के खिलाफ सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बार एसोसिएशन की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई थी और अब उसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने आदेश दिया है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद हल्द्वानी की वह जमीन तुरंत हाईकोर्ट प्रशासन को सौंप दी जाए, ताकि नए परिसर का निर्माण कार्य आगे बढ़ सके।

 


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