Buried Alive?अपनी वसीयत लिखकर अपने ही अंतिम संस्कार के लिए ज़मीन के अंदर ज़िंदा दफन हो रहे है लोग!आखिर क्यों?
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं सुकून नही है। मौत के बाद शांति ही शांति मिल जाती है। लेकिन क्या हो कि किसी की मौत भी न हुई हो और उसे ज़िंदा ही दफन कर दिया जाए? और ज़िंदा दफन करने की एवज में 47 लाख रुपये की फीस भी ली जाए? चौंक गए ना? लेकिन ये सच है। हाल ही में रूसी कंपनी ने एक ऑफर के माध्यम से सबको हैरान कर दिया जिसमें लोगो को ज़िंदा दफन किये जाने का ऑफर दिया जा रहा था,वो भी मोटी रकम लेकर।

डेलीस्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह एक रूसी कंपनी है।इस कंपनी ने अजीबोगरीब थेरेपी की शुरुआत की है. इस थेरेपी के तहत शख्स को जमीन के अंदर जिंदा दफन होना पड़ता है. कंपनी का दावा है कि इस थेरेपी से एंजाइटी से जूझ रहे लोगों को निजात मिलेगी. कंपनी ने बकायदा इसके बारे में विस्तार से समझाया है.
इस थेरेपी का मुख्य मकसद लोगों को अपने खुद के अंतिम संस्कार का अनुभव देना है. इसके अलावा इसमें लोगों को भागदौड़ भरे जीवन के बीच कुछ शांति प्रदान करने की भी कोशिश बताई गई है. थेरेपी के दौरान संगीत सुनने का मौका मिलता है, मोमबत्तियां जलाई जाती हैं और उसे एक आभासी वसीयत लिखने का मौका भी मिलता है.

इस कंपनी को फिलहाल रूस में शुरू किया गया है कंपनी के मालिक ने बताया लोगों को अपने डर और एंजाइटी से निपटने में मदद की जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि यह थेरेपी पूरी तरह सुरक्षित है. हम अपने क्लाइंट्स को बिना वजह रिस्क में नहीं डालते हैं. फ़िलहाल इसकी कीमत 47 लाख रुपये रखी गई है और यह करीब एक घंटे की थेरेपी है,जिसके तहत प्रोसीजर करवाने वाले शख्स को 20 से 60 मिनट तक जमीन के अंदर दफन रहना ही पड़ता है. कंपनी ने इस प्रोसीजर को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
इस अजीबोगरीब थेरेपी को शुरू करने वाली कंपनी का नाम Prekated Academy है. इसकी स्थापना Yakaterina Preobrazhenskaya ने की है. उन्होंने बताया कि फ्यूनरल पैकेज के तहत लोगों को अपने डर और एंजाइटी से निपटने में मदद की जाती है. Yakaterina Preobrazhenskaya ने बताया कि यह अनुभव खुद से लड़ने को लेकर है, जिससे व्यक्ति जीवन में खुश रह सके.
इंस्टाग्राम पोस्ट में Yakaterina Preobrazhenskaya ने इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि जिंदा दफन होना पूरी तरह सुरक्षित है. हम अपने क्लाइंट्स को बिना वजह रिस्क में नहीं डालते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इस थेरेपी को लेकर कई लोग संपर्क करते हैं, लेकिन हरेक को यह थेरेपी नहीं मिल पाती है. हम लोगों को कई दूसरे विकल्प भी प्रदान करते हैं, वह अपनी इच्छानुसार इन्हें चुन सकता है.
20-60 मिनट जमीन के अंदर रहना पड़ता है दफन
रिपोर्ट में बताया गया है कि शख्स को इस प्रक्रिया के दौरान 20 से लेकर 60 मिनट तक जमीन के अंदर दफन रहना होता है. एक बार यह प्रोसीजर पूरा हो जाता है तो ताबूत भी कस्टमर को वापस कर दिया जाता है.