हरेला पर्व पर ओमेक्स रिवेरा सोसाइटी में गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने रोपे पौधे
रुद्रपुर। उत्तराखंड के पावन लोकपर्व ‘हरेला’ के शुभ अवसर पर रुद्रपुर की प्रसिद्ध ओमेक्स रिवेरा सोसाइटी में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरियाली, खुशहाली और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने वाले इस पारंपरिक त्योहार को सोसाइटी के निवासियों ने बेहद आधुनिक और जिम्मेदार अंदाज में मनाया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित व सुरक्षित वातावरण उपहार में देना रहा। इस कार्यक्रम में सोसाइटी परिसर के भीतर विभिन्न प्रकार के छायादार, फलदार और औषधीय पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान पूरा परिसर ‘हरेला’ के पारंपरिक गीतों और प्रकृति संरक्षण के नारों से जीवंत हो उठा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों ने हरेला पर्व के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। लोगों ने न केवल पौधे लगाने, बल्कि उनकी पूर्ण रूप से देखभाल करने और उन्हें वृक्ष बनाने का एक सामूहिक संकल्प भी लिया। इस पूरी मुहिम की सबसे खूबसूरत कड़ी सोसाइटी के नन्हे-मुन्ने बच्चे रहे। नई पीढ़ी को पर्यावरण से जोड़ने की इस अनूठी पहल में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अपने छोटे-छोटे हाथों से मिट्टी खोदकर पौधे लगाते हुए इन बच्चों ने बड़ों को भी प्रेरित किया। बच्चों के इस उत्साह ने समाज को यह कड़ा संदेश दिया कि पृथ्वी को हरा-भरा रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इस सराहनीय और प्रेरणादायक आयोजन में ओमेक्स रिवेरा सोसाइटी के वरिष्ठ निवासियों और समाजसेवियों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनमोहन कामरा, राकेश चौहान,सुनील झवर,ध्रुव सिंह,आनंद नेगी,नित्य प्रकाश,अश्विनी सहित सोसाइटी के अनेक गणमान्य निवासी, सुरक्षाकर्मी, कर्मचारी एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने एकजुट होकर इस अभियान को सफल बनाया। ओमेक्स रिवेरा सोसाइटी द्वारा आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम सिर्फ एक दिवसीय आयोजन न होकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ठोस कदम साबित हुआ है। सोसाइटी प्रबंधन और निवासियों की इस सामूहिक भागीदारी ने रुद्रपुर के अन्य रिहायशी इलाकों और पूरे समाज के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि हर सोसाइटी इसी तरह अपनी जिम्मेदारी समझे, तो हम ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ते हुए अपनी देवभूमि को हमेशा हरा-भरा रख सकते हैं।