पीएम मोदी ने किया दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण,अब ढाई घंटे में दून से दिल्ली
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के लिए आज का दिन इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करोड़ों लोगों के वर्षों पुराने इंतजार को खत्म करते हुए 212 किमी लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का भव्य लोकार्पण किया। ₹11,963 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे न केवल उत्तराखंड, बल्कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी की नई परिभाषा लिखेगा।
लोकार्पण समारोह की शुरुआत बेहद गरिमामय रही। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पीएम मोदी को 'ब्रह्मकमल' का स्मृति चिन्ह भेंट किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री का स्वागत उत्तराखंड की पारंपरिक शॉल और 'नंदा देवी राजजात यात्रा' का प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया। यह कॉरिडोर कई मायनों में दुनिया के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर को टक्कर देता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता 12 किमी लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है, जिसे भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन प्रमुख जोन (गणेशपुर, मोहंड और आसारोड़ी) में बांटा है। यह एशिया का अपनी तरह का सबसे अनूठा कॉरिडोर है, जिससे जंगल के बीच से गुजरते वाहनों के शोर से वन्यजीवों को कोई परेशानी नहीं होगी। दिसंबर 2021 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज पूरी तरह तैयार है। दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के रास्ते देहरादून के आशारोड़ी को जोड़ता है। इस मार्ग पर 100 से अधिक अंडरपास, कई फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और अत्याधुनिक टनल बनाई गई हैं। इसके शुरू होने से अब दिल्ली और देहरादून के बीच का सफर मात्र ढाई से तीन घंटे का रह जाएगा, जो पहले 6 से 7 घंटे लेता था। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजनीति के कई दिग्गज मौजूद रहे। केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सुबोध उनियाल, गणेश जोशी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति इस गौरवशाली पल के साक्षी बने। इस एक्सप्रेसवे के खुलने से उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं पैदा होंगी। कम समय में देहरादून पहुँचने की सुविधा से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। यह कॉरिडोर वास्तव में उत्तराखंड की प्रगति के लिए 'ग्रोथ इंजन' साबित होने वाला है।