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पीएम मोदी की ‘एक साल सोना मत खरीदिए’ अपील से देशभर के सर्राफा बाजार में मची हलचल, करोड़ों के गोल्ड कारोबार पर संकट की आशंका, छोटे व्यापारियों और कारीगरों में बढ़ी चिंता

editor
  • Awaaz Desk
  • May 11, 2026 08:05 AM
PM Modi's appeal to "avoid buying gold for a year" has caused a stir in the bullion market across the country, threatening a crisis for gold businesses worth crores, and raising concerns among small traders and artisans.

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हालिया अपील ने देशभर के सर्राफा बाजार में नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री ने लोगों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपील की है। इस बयान के बाद जहां अर्थशास्त्री इसे देश की आर्थिक मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लाखों व्यापारी और कारीगर संभावित नुकसान को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सामाजिक परंपरा, शादी-विवाह, धार्मिक आस्था और पारिवारिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। देश में छोटे, मझोले और बड़े मिलाकर करीब 3 लाख से 5 लाख तक ज्वेलर्स और सर्राफा व्यापारी सक्रिय माने जाते हैं। इनमें लगभग 85 से 90 प्रतिशत छोटे स्थानीय दुकानदार हैं, जबकि बड़े ब्रांडेड कारोबारियों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है। ऐसे में यदि लंबे समय तक सोने की खरीदारी प्रभावित होती है तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारियों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का सीधा संबंध भारत के बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार से है। भारत अपने उपयोग का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। इसी तरह कच्चे तेल के आयात पर भी भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग कुछ समय तक गैर-जरूरी खर्च कम करें ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव घट सके और रुपये को स्थिरता मिल सके। हालांकि दूसरी तरफ सर्राफा कारोबारियों की चिंता भी कम नहीं है। भारत में लाखों परिवार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ज्वेलरी कारोबार पर निर्भर हैं। छोटे दुकानदारों से लेकर सुनार, कारीगर, पॉलिशिंग कर्मचारी, डिजाइनर और मजदूर तक इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। यदि लोग सोना खरीदना कम कर देते हैं तो सबसे पहले छोटे कारोबारियों की बिक्री प्रभावित होगी। शादी-विवाह के सीजन में कारोबार कमजोर पड़ सकता है और कारीगरों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी समूह कुछ हद तक इस स्थिति को संभाल सकते हैं क्योंकि उनके पास निवेश, डायमंड, हल्के आभूषण और अन्य उत्पादों के विकल्प मौजूद होते हैं। लेकिन छोटे सर्राफा व्यापारी पूरी तरह स्थानीय खरीदारी पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। आर्थिक विशेषज्ञ इसे “देशहित बनाम व्यापारिक दबाव” की स्थिति मान रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि यदि सोने और ईंधन की खपत नियंत्रित होती है तो देश को विदेशी मुद्रा संकट से राहत मिल सकती है। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि भारत जैसे देश में सोना केवल विलासिता नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी है, इसलिए लंबे समय तक खरीद रोकना व्यवहारिक रूप से आसान नहीं होगा। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे राष्ट्रहित में जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कई छोटे व्यापारी इसे सर्राफा कारोबार के लिए खतरे की घंटी मान रहे हैं। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि प्रधानमंत्री की अपील का असर केवल चर्चा तक सीमित रहता है या वास्तव में देश के गोल्ड बाजार और आम उपभोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।


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