गोथेनबर्ग में पीएम मोदी की 'मेगा पिच': यूरोप के दिग्गजों को भारत आने का न्योता, अगले 5 साल के लिए मांगा नया कमिटमेंट
स्वीडन के प्रमुख औद्योगिक केंद्र और यूरोपीय विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के प्रतीक गोथेनबर्ग शहर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार जगत में भारत की धाक जमाते हुए एक बड़ी आर्थिक कूटनीति की शुरुआत की है। ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ (ERT) के एक हाई-लेवल सेशन में पीएम मोदी ने यूरोप की सबसे प्रभावशाली और दिग्गज कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों (सीईओ और चेयरपर्सन) को संबोधित करते हुए उन्हें भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की संयुक्त मेजबानी में हुआ यह आयोजन हाल के वर्षों में भारत और यूरोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण बिजनेस मुलाकातों में से एक बन गया है। इस बेहद खास सत्र में टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स की ग्लोबल लीडर कंपनियां एक मंच पर मौजूद थीं। बैठक में वोडाफोन, एरिक्सन, नोकिया, ऑरेंज, एएसएमएल, एसएपी, कैपजेमिनी, शेल, वोल्वो ग्रुप, मार्सक, एयरबस, एस्ट्राजेनेका, रोश, नेस्ले और यूनिलीवर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोप के बीच औद्योगिक सहयोग को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक पांच-सेक्टर के ढांचे (5-Sector Framework) की रूपरेखा पेश की। इसके साथ ही उन्होंने वहां मौजूद हर कंपनी से अपील की कि वे अगले पांच वर्षों के लिए भारत में निवेश का एक नया और ठोस संकल्प (कमिटमेंट) लें। प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए हालिया मुक्त व्यापार समझौते का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसे उन्होंने वैश्विक व्यापार के लिहाज से 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (सभी समझौतों की मां) करार दिया। उन्होंने यूरोप के निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत में उन्हें मजबूत स्ट्रक्चरल फायदे मिलेंगे। भारत-यूरोप के बिजनेस संबंधों को केवल बैठकों तक सीमित न रखकर उन्हें जमीनी हकीकत में बदलने के लिए पीएम मोदी ने कई बड़े और व्यावहारिक प्रस्ताव रखे। हर साल दोनों पक्षों के शीर्ष उद्योगपतियों की नियमित बैठक।सेक्टर-स्पेसिफिक वर्किंग ग्रुप्स: प्राथमिकता वाले 5 क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए विशेष कार्य समूह। भारत में काम कर रही यूरोपीय कंपनियों की मदद और नए निवेशकों को हर संभव सपोर्ट देने के लिए विशेष डेस्क। बड़े प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों, इसके लिए सरकार समर्थित संस्थागत समीक्षा। निवेशकों को पूर्ण समर्थन का भरोसा देते हुए प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस सहयोग के जरिए पहचाने गए हर बड़े प्रोजेक्ट को भारत सरकार का सीधा और मजबूत बैकअप मिलेगा। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि भारत आज 1.4 बिलियन (140 करोड़) लोगों का घर है, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक स्तर पर तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में स्थापित हो चुका है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, नई सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी, मोबिलिटी एग्रीमेंट और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल के जरिए सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। बता दें कि ERT यूरोप की सबसे प्रभावशाली बिजनेस बॉडी है, जिसमें लगभग 55 दिग्गज यूरोपीय कंपनियों के प्रमुख शामिल हैं। पीएम मोदी की इस 'मेगा पिच' के बाद अब भारत में यूरोपीय निवेश की एक नई लहर आने की उम्मीद जताई जा रही है।