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मेरठ में न्याय मांगने वालों पर पुलिस का डंडा! दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में एसएसपी के थप्पड़कांड का वीडियो वायरल, विपक्ष ने सरकार और पुलिस पर बोला तीखा हमला

editor
  • Awaaz Desk
  • July 12, 2026 08:07 AM
Police crack down on those seeking justice in Meerut! A video showing the SSP slapping someone during the case of Dalit student Lalita Gautam's murder has gone viral; the opposition has launched a scathing attack on the government and the police.

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीए की छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद मृतका के परिजनों और विभिन्न संगठनों का आरोप है कि हत्या में अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी गिरफ्तारी नहीं की गई। इसी मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और एसएसपी अविनाश पांडेय का प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और गहरा गया है। कमिश्नरी चौराहे पर न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। इस दौरान कई लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेजा गया। इस प्रदर्शन के दौरान एसएसपी मेरठ ने आरोपियों पर कार्रवाई करने की जगह न्याय की मांग कर रहे लोगों को ही पीटना शुरू कर दिया है। एसएसपी मेरठ अविनाश पांडे ने बंदी वाहन के अंदर प्रदर्शन कर रहे लोगों को जमकर पीटा। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना के वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निशाने पर ले लिया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दलित बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे लोगों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने प्रशासन के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। इधर, आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रूहाना (सिवाया) टोल प्लाजा पर रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उठाया गया। टोल प्लाजा पर चंद्रशेखर आज़ाद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। आज़ाद ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। वायरल वीडियो में वह इंस्पेक्टर से यह कहते दिखाई देते हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस दौरान उनके समर्थकों ने भी नारेबाजी की। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह "चोरी-छिपे नहीं, बल्कि डंके की चोट पर मेरठ जा रहे हैं" और जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। 

विवाद के बीच मेरठ एसएसपी का संदेश; समर्थक एक, विरोधी दो पेड़ लगाएं
उधर, पूरे विवाद के बीच एसएसपी अविनाश पांडेय ने एक वीडियो संदेश जारी कर समर्थकों और विरोधियों दोनों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग उनका समर्थन करते हैं, वे एक पौधा लगाएं और जो विरोध करते हैं, वे दो पौधे लगाकर समाज को सकारात्मक संदेश दें। उन्होंने लोगों से स्वच्छता बनाए रखने, पॉलीथिन का प्रयोग कम करने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की। हालांकि उनके इस संदेश के बावजूद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस जारी है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति आयोजित किया गया था और कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करने के साथ-साथ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार स्थिति उग्र होने पर हल्का बल प्रयोग किया गया। प्रशासन का दावा है कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। घटना के बाद पुलिस ने 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है तथा सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। दूसरी ओर मृतका के परिजनों का कहना है कि पुलिस की जांच अधूरी है और केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी से न्याय नहीं मिलेगा। परिवार का आरोप है कि हत्या की साजिश में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। परिजन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
20 वर्षीय ललिता गौतम मेरठ के टीपी नगर क्षेत्र स्थित गगन एन्क्लेव की निवासी थीं और बीए की छात्रा थीं। 15 मई को वह परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं। अगले दिन परिजनों ने टीपी नगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें वह गांव कल्याणपुर निवासी अंकुश नामक युवक के साथ जाती दिखाई दीं। पुलिस ने अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने हत्या करने की बात स्वीकार करने का दावा किया। पुलिस के अनुसार दोनों एक-दूसरे को जानते थे और घटना वाले दिन किसी बात को लेकर विवाद हुआ। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे युवती पर किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत का संदेह था। इसी विवाद के दौरान उसने कथित रूप से हत्या कर शव को उपसिया जंगल के समीप गन्ने के खेत में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर 17 मई को शव बरामद किया और 18 मई को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में साक्ष्य मिटाने के आरोप में एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। हालांकि परिजनों का आरोप है कि इतनी बड़ी वारदात अकेले एक व्यक्ति द्वारा अंजाम देना संभव नहीं है। इसी आधार पर वे अन्य संभावित आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे मामला अब कानून-व्यवस्था और राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।


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