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 सियासी दंगल: टिकट पाने की होड़ में भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गज,पुरानों पर भरोसा या नए पर खेला जाएगा दांव

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 26, 2026 02:06 PM
Political Arena: Many BJP and Congress stalwarts vie for tickets—will the parties place their trust in veterans or bet on new faces?

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। राज्य की सबसे प्रतिष्ठित और वीवीआईपी सीटों में शुमार डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में टिकट पाने की होड़ ने दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर फिलहाल बृजभूषण गैरोला विधायक हैं, लेकिन इस बार पार्टी के भीतर ही टिकट के दावेदारों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो चुकी है। संगठन अपने वर्तमान विधायक पर ही दोबारा भरोसा जताएगा या किसी नए चेहरे को मैदान में उतारेगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन टिकट की यह अंदरूनी दौड़ बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इतिहास बदलने के लिए नए समीकरण साधने में जुटी है।

डोईवाला विधानसभा सीट का इतिहास गवाह है कि यह पारंपरिक रूप से भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक रही है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से सत्ताधारी दल भाजपा में टिकट के चाहने वालों की कतार सबसे लंबी है। वर्तमान विधायक बृजभूषण गैरोला के अलावा इस बार कई कद्दावर चेहरे अपनी दावेदारी पूरे दमखम के साथ पेश कर रहे हैं। महिला नेतृत्व और संगठन में मजबूत पकड़ के दम पर रेस में आगे हैं। महिला विंग की कमान संभालने के कारण इनकी सक्रियता क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। पूर्व सैन्य अधिकारी और बड़ा चेहरा होने के नाते उनकी दावेदारी को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। स्थानीय संगठन पर मजबूत पकड़ के साथ वे भी मैदान में जोर-आजमाइश कर रहे हैं। राज्य गठन के बाद से हुए पांच आम चुनावों में कांग्रेस इस सीट पर कभी भी मुख्य चुनाव नहीं जीत सकी है। उसे एकमात्र कामयाबी 2014 के उपचुनाव में मिली थी। आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस में भी दावेदारों ने अभी से जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। कांग्रेस की ओर से जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, वर्तमान ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी (जिन्होंने 2022 का चुनाव लड़ा था), अश्विनी बहुगुणा और मनोज नौटियाल जैसे युवा व सक्रिय चेहरे टिकट की कसरत में जुटे हैं। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि भाजपा के इस अभेद्य किले को ढहाने के लिए कांग्रेस किसी बड़े और कद्दावर चेहरे को मैदान में उतार सकती है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। हरक सिंह ने खुद संकेत दिए हैं कि पार्टी आलाकमान उन्हें जिस भी सीट से चुनाव लड़ने का निर्देश देगा, वे वहीं से मैदान में उतरेंगे। यदि हरक सिंह की डोईवाला में एंट्री होती है, तो यह मुकाबला राज्य के सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में तब्दील हो जाएगा। 2022 के चुनाव में भाजपा के बृजभूषण गैरोला ने कांग्रेस के गौरव चौधरी को रिकॉर्ड 29,021 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। इस बड़ी हार के बाद कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। दोनों ही दलों के आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि वे 'जीत की गारंटी' बनने वाले चेहरे को ही टिकट दें। जहां भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी को संभालते हुए अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है। फिलहाल, दोनों दलों के दावेदार गांवों और कस्बों में चौपालें लगा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला आलाकमान के पाले में है, जिसने इस हॉट सीट की जंग को और अधिक सस्पेंस से भर दिया है।


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