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झारखंड में 'समीक्षा बैठक' पर छिड़ा सियासी घमासान: बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला, झामुमो का करारा पलटवार

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 16, 2026 11:07 AM
Political row erupts in Jharkhand over 'review meeting': Babulal Marandi launches scathing attack; JMM hits back hard.

रांची। झारखंड की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के कामकाज की की जा रही ताबड़तोड़ समीक्षा बैठकों को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकारी मशीनरी को दुरुस्त करने और योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसे महज एक दिखावा करार दे रही है। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी और वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने लगभग सभी प्रमुख सरकारी विभागों के कामकाज की गहन समीक्षा की है। बैठकों के दौरान मुख्यमंत्री ने ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है और स्पष्ट हिदायत दी है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की मंशा है कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील बनाया जाए ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ सुगमता से पहुंच सके। सरकार की इस सक्रियता पर तीखा हमला बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने पूरी समीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार के कार्यकाल को साढ़े छह वर्ष (गठबंधन सरकार के कुल समय को जोड़ते हुए) हो चुके हैं, लेकिन इस लंबी अवधि में मात्र तीन खदानों की नीलामी ही हो सकी है। ऐसे में यह समीक्षा बैठक सिर्फ एक 'आईवॉश' (आंखों में धूल झोंकना) है। सरकार वास्तव में क्या काम कर रही है, यह राज्य की जनता भली-भांति जानती है। केवल कागजी बैठकों से जमीन पर बदलाव नहीं आने वाला। भाजपा के इन आरोपों पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हमारी सरकार भाजपा के एजेंडे को पूरा करने के लिए नहीं बनी है। झामुमो ने कहा कि यह सरकार राज्य की जनता के प्रचंड जनादेश से बनी है और वह केवल जनता के प्रति जवाबदेह है। समीक्षा बैठकों का उद्देश्य विभिन्न विभागों के कामकाज में आ रही बाधाओं और कमियों को पहचान कर उन्हें तुरंत दूर करना है। इस कवायद से आम जनता के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और भरोसेमंद संदेश गया है कि उनका मुख्यमंत्री उनके अधिकारों को लेकर सजग है। समीक्षा बैठक से शुरू हुई यह सियासी जंग अब व्यक्तिगत और तीखे राजनीतिक हमलों में तब्दील हो चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज होंगी, सरकार के कामकाज और विपक्ष के हमलों की यह धार और पैनी होगी। फिलहाल, सीएम हेमंत सोरेन की इस प्रशासनिक कसावट का जनता पर क्या असर पड़ता है और विपक्ष इस मुद्दे को किस हद तक भुना पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
 


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