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उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर सियासी घमासान: कैबिनेट मंत्री कैड़ा के 'आतंकवाद' वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 04, 2026 01:04 PM
Political Showdown Over Uttarakhand's Law and Order: Congress Hits Back at Cabinet Minister Kaida's 'Terrorism' Remark

देहरादून। उत्तराखंड में बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध ग्राफ को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के एक विवादित बयान ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। मंत्री ने कांग्रेस को 'आतंकवाद की जननी' करार देते हुए दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में जनता सबसे अधिक सुरक्षित है।

हाल ही में कैबिनेट में शामिल हुए राम सिंह कैड़ा ने विपक्ष के आरोपों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश में जहाँ-जहाँ कांग्रेस की सरकारें रही हैं, वहां कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक रही है। उन्होंने पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति उत्तराखंड से कहीं अधिक खराब है। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज देश से आतंकवाद और माओवाद का खात्मा हो रहा है और अपराधी सरेंडर कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "आतंकवाद तो कांग्रेस के कार्यकाल की देन है। जम्मू-कश्मीर में धमाके और खूंखार आतंकवादियों को पनाह मिलना कांग्रेस के शासन की पहचान रही है।" कैबिनेट मंत्री के इन आरोपों पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने मंत्री कैड़ा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें नई-नई कुर्सी मिली है, इसलिए वे अपनी जिम्मेदारी समझने के बजाय मुख्यमंत्री को खुश करने वाले बयान दे रहे हैं। सुजाता पॉल ने कहा, "प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और भ्रष्टाचार चरम पर है। जनता डरी हुई है, लेकिन सरकार के मंत्री काल्पनिक दावों में व्यस्त हैं।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि राम सिंह कैड़ा को कांग्रेस शासित राज्यों की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें उत्तराखंड छोड़कर हिमाचल चले जाना चाहिए। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में प्रदेश में हुई आपराधिक घटनाओं के बाद से सामाजिक संगठन और आम जनता भी पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। एक ओर जहाँ पुलिस के सामने चुनौतियां बढ़ी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों के ऐसे बयान जमीनी हकीकत से ध्यान भटकाने की कोशिश माने जा रहे हैं। फिलहाल, कानून व्यवस्था के मुद्दे पर शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और आने वाले दिनों में सदन से लेकर सड़क तक इस पर हंगामा होने के आसार हैं।
 


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