बिहार में सियासी हलचल: 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण! भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को कमान सौंपी
बिहार की राजनीति एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदलने वाले हैं। राज्य में 'बड़े सियासी उलटफेर' की अटकलें अब हकीकत में तब्दील होती दिख रही हैं। ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार, बिहार में 15 अप्रैल को नई सरकार का गठन होने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व ने कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कर पटना भेजा है।
बिहार की राजधानी पटना में सियासी पारा अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री आवास पर आज एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) दोनों ही दलों ने अपने सभी विधायकों को अगले 48 घंटों के लिए अनिवार्य रूप से पटना में ही रहने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में नए मंत्रिमंडल के विस्तार, मंत्रियों की संभावित संख्या और सबसे महत्वपूर्ण विभागों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लगनी है। बिहार की राजनीति में 14 और 15 अप्रैल की तारीखें ऐतिहासिक होने वाली हैं। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू होगी। माना जा रहा है कि 13 अप्रैल को मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। हिंदू मान्यताओं के अनुसार 'खरमास' खत्म होते ही 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इसके तत्काल बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चयन कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव की निगरानी करेंगे। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा अब बिहार में नेतृत्व और संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है। शनिवार शाम को हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया। दोनों उपमुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, अचानक मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। नीतीश कुमार के साथ करीब 30 मिनट तक चली इस मुलाकात के तुरंत बाद विजय सिन्हा का राजभवन पहुंचना महज 'इत्तेफाक' नहीं माना जा रहा है। इधर दिल्ली में भाजपा कोर कमेटी की बैठक का अचानक रद्द होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि बिहार की स्क्रिप्ट पूरी तरह तैयार हो चुकी है और अब केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।