झारखंड में सियासी भूचाल: सुरक्षा हटने से नाराज वित्त मंत्री ने लौटाई 'वाई'' श्रेणी की सुरक्षा, कांग्रेसी नेताओं का फूटा गुस्सा-कुछ भी हुआ तो डीएसपी होंगे जिम्मेदार
रांची। झारखंड की सियासत में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी उबाल देखा जा रहा है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों को अचानक हटाए जाने के प्रशासनिक फैसले से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रशासनिक अनदेखी और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़ी विफलता से आहत होकर वित्त मंत्री ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पूरी 'वाई' श्रेणी की सरकारी सुरक्षा और सरकारी वाहन पुलिस मुख्यालय को वापस लौटा दिए हैं। वित्त मंत्री ने पुलिस महानिदेशक को कड़ा पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उन्हें अपनी जान की नहीं, बल्कि उनके साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा की चिंता थी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनके लिए आत्मसम्मान और गरिमा से बढ़कर कोई सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं है। सुरक्षा लौटाने के बाद से मंत्री पूरी तरह अकेले ही सार्वजनिक कार्यक्रमों, प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) और यहां तक कि इवनिंग वॉक पर निकल रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
मामले की जड़ में सुरक्षाकर्मियों के आवागमन के लिए एक अतिरिक्त वाहन की मांग थी। वित्त मंत्री ने अपने साथ चलने वाले 16 सुरक्षाकर्मियों के सुरक्षित और सुचारू आवागमन के लिए पुलिस मुख्यालय से एक अतिरिक्त गाड़ी का अनुरोध किया था। लेकिन प्रशासन ने वाहन देने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था में ही कटौती कर दी, जिसके विरोध में मंत्री ने पूरी सुरक्षा वापस कर दी। इस गंभीर मामले को लेकर मेदिनीनगर परिसदन में 'वीर बाबा चौहरमल कल्याण समिति' के जिलाध्यक्ष संदीप कुमार पासवान और छतरपुर विधानसभा के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। नेताओं ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि यदि वित्त मंत्री की सुरक्षा तुरंत सम्मानपूर्वक बहाल नहीं की गई, तो राज्यव्यापी बड़ा जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि छतरपुर विधानसभा क्षेत्र घोर उग्रवाद प्रभावित इलाका है। क्षेत्र के विधायक और सूबे के वित्त मंत्री होने के नाते राधाकृष्ण किशोर को लगातार सुदूर जंगली और उग्रवाद प्रभावित संवेदनशील इलाकों में जनता के बीच भ्रमण करना पड़ता है। मंत्री हमेशा से ही समाज विरोधी तत्वों और उग्रवादियों के निशाने पर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उनके सुरक्षा घेरे को हटाना या कमजोर करना सीधे तौर पर उनके जीवन को गंभीर खतरे में डालने जैसा है। नेताओं ने साफ कहा कि यदि इस लापरवाही के बीच वित्त मंत्री के साथ कोई भी अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी सारी जवाबदेही और जिम्मेदारी सीधे राज्य के पुलिस महानिदेशक की होगी। कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि खुद वित्त मंत्री द्वारा लिखित पत्र दिए जाने के बावजूद डीजीपी कार्यालय ने अब तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है, जो प्रशासनिक तानाशाही को दर्शाता है। पलामू जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश पासवान और वरिष्ठ कार्यकर्ता अशोक सोनी ने कहा कि राधाकृष्ण किशोर पूरे झारखंड की बुलंद आवाज हैं। उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। अब यह लड़ाई सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि वे इस संवेदनशील मामले में खुद हस्तक्षेप करें और डीजीपी को तुरंत पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने का निर्देश दें। इस मौके पर अजय पासवान, अशोक पासवान, राजकमल तिवारी, विवेक कुमार समेत भारी संख्या में पार्टी पदाधिकारी मौजूद थे।