2022 में गया सड़क की मरम्मत और डामरीकरण का प्रस्ताव आज तक नहीं मिला जवाब, जान जोखिम में डालकर कर रहे ग्रामीण सफर।
प्रदेश आज दैवीय आपदाओं की जद में है और ऐसे में लोगों की जान किस कदर जोखिमों से भरी है ये किसी से छुपा भी नहीं है, पहाड़ों पर हालात ऐसे है कि कब मौत सर पर बरस पड़े कुछ कह नहीं सकते लेकिन महत्वपूर्ण बात तो ये है कि प्रदेश के पहाड़ों के हाल जानने के बावजूद भी प्रशासनिक अधिकारियों की कछुवा गति से काम करने की प्रणाली के चलते लोगों को इसका खामियाजा अपनी जान देकर गंवाना पड रहा है, हालात ये हैं कि प्रदेश की ज्यादातर सड़कें बंद है और ज्यादातर पुल खतरे की जद में है, ये आंकड़े हमारे नहीं बल्कि सरकार के उन काबिल ब्यूरोक्रेट्स के है जिनके कन्धों पर प्रदेश के विकास की बागडोर है, ऐसे में सालों तक गंभीर मामलों की फाइलें दीमक के हवाले करने वाले काबिल अधिकारियों को तब ही काम करने की सुध जागती है जब कोई बड़ा हादसा सामने आ जाता है, जबकि उससे पहले सिर्फ प्रस्तावों में ही महकमा महत्वपूर्ण कार्यों को घुमाती रहती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है नैनीताल जिले का, जहां पर्यटकों का बेहद ही आकर्षण का केन्द्र है, वहीं सात ताल को जाने वाला एक मात्र मार्ग पिछले चार सालों से क्षतिग्रस्त है, वहीं इस बरसात में खतरा और भी बढ़ गया है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है, जिसको बनाने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा की बार जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को इस बारे में अवगत भी कराया गया लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी, वहीं 2022 में विभाग ने किसी तरह से प्रस्ताव बनाया और शासन को भेज दिया लेकिन आज तक उसका कोई जवाब विभाग को पलट कर नहीं मिला, वहीं नैनीताल परिक्षेत्र सांसद अजय भट्ट ने भी नैनीताल जिले की सबसे खूबसूरत सात ताल को जाने वाले मार्ग के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए लेकिन उनके निर्देशों का भी अधिकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा लिहाजा क्या हालात है और क्या समस्या है आप खुद ही सुनिये।