• Home
  • News
  • Public outrage against the mining ban in Uri-Boniar! Thousands took to the streets and issued a warning.

उरी-बोनियार में खनन प्रतिबंध के खिलाफ जनाक्रोश! सड़कों पर उतरे हजारों लोग, दी चेतावनी

editor
  • Awaaz Desk
  • September 30, 2025 11:09 AM
Public outrage against the mining ban in Uri-Boniar! Thousands took to the streets and issued a warning.

उरी/बोनियार। जम्मू-कश्मीर के उरी और बोनियार क्षेत्रों में लाचीपोरा वन्यजीव अभयारण्य के निकट जिप्सम खनन पर लगे प्रतिबंध ने स्थानीय समुदाय को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। इस प्रतिबंध ने क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले खनन उद्योग को ठप कर दिया, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। सोमवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, जिन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल प्रतिबंध हटाने या वैकल्पिक रोजगार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिप्सम खनन इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था। स्थानीय निवासी रशीद अहमद ने कहा कि हमारे पास खनन के अलावा कोई दूसरा रोजगार नहीं है। सरकार ने बिना सोचे-समझे यह प्रतिबंध लगाया, जिसने हमें भुखमरी की कगार पर ला खड़ा किया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या की है। उनका दावा है कि कोर्ट का आदेश पर्यावरण संरक्षण के लिए था, न कि खनन को पूरी तरह बंद करने के लिए। जिला प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट के पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित आदेश के अनुपालन में लगाया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि हम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। लाचीपोरा अभयारण्य की जैव-विविधता को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जा रहा है। स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस संकट का त्वरित समाधान निकालने की अपील की है। प्रदर्शनकारी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और उग्र होगा। यह मुद्दा अब पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन का सवाल बन गया है, जिसका समाधान सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


संबंधित आलेख: