जाम के झाम में पहाड़ों की रानी: मसूरी में 31 किलोमीटर का सफर बना 5 घंटे का टॉर्चर, ट्रैफिक प्लान पूरी तरह फेल
मसूरी। गर्मियों के सीजन के चरम पर पहुंचते ही देश-दुनिया के पर्यटकों की पहली पसंद रही 'पहाड़ों की रानी मसूरी' एक बार फिर भीषण ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गई है। वीकेंड पर हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि दिल्ली से देहरादून का करीब 250 किलोमीटर का सफर जहां पर्यटक शानदार हाईवे के जरिए मात्र ढाई से तीन घंटे में पूरा कर रहे हैं, वहीं देहरादून से मसूरी की महज 31 किलोमीटर की चढ़ाई तय करने में उन्हें 5 से 6 घंटे की कठिन परीक्षा देनी पड़ रही है। लगातार लग रहे इस महाजाम से न केवल बाहरी राज्यों से आए सैलानी, बल्कि स्थानीय निवासी और स्थानीय व्यवसाई भी बेहद त्रस्त हैं।
शनिवार को मसूरी के लगभग सभी लाइफलाइन कहे जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की अंतहीन कतारें देखने को मिलीं। गांधी चौक, लाइब्रेरी चौक, पिक्चर पैलेस, माल रोड, टिहरी बाईपास रोड और प्रसिद्ध कैम्पटी फॉल मार्ग पर घंटों तक यातायात रेंगता नजर आया। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से भारी उत्साह के साथ आए पर्यटकों ने बताया कि देहरादून तक का सफर बेहद सुगम रहा, लेकिन मसूरी की सीमा में घुसते ही वे चिलचिलाती धूप में घंटों जाम में फंस गए, जिससे उनका सारा रोमांच मायूसी में बदल गया। सैलानियों ने आरोप लगाया कि इस पीक सीजन में भी प्रशासन और पुलिस द्वारा ट्रैफिक प्रबंधन के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। कई संवेदनशील चौराहों से पुलिसकर्मी गायब दिखे, जिसके बाद मजबूरन स्थानीय नागरिकों और खुद पर्यटकों ने ही वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए मोर्चा संभाला और यातायात व्यवस्था दुरुस्त की। सबसे गंभीर स्थिति टिहरी बाईपास रोड पर देखी गई, जहां धनोल्टी और नई टिहरी जाने वाले वाहनों के अत्यधिक दबाव और संकरी सड़क के कारण थोड़ी सी भी रुकावट कई किलोमीटर लंबे जाम की वजह बन गई। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि हर साल वीकेंड पर यही कहानी दोहराई जाती है, लेकिन सरकार इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाती। शहर की क्षमता से कई गुना अधिक वाहन रोजाना मसूरी पहुंच रहे हैं, जबकि पार्किंग बेहद सीमित है। सड़कों के किनारे खड़ी अवैध पार्किंग ने कोढ़ में खाज का काम किया है। स्थानीय जनता ने अब सरकार से मांग की है कि मसूरी के पर्यटन व्यवसाय को बचाने के लिए यहां तुरंत बहुस्तरीय (मल्टीलेवल) पार्किंग बनाई जाए, नए वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जाएं और सीजन के दौरान एक कड़ा व प्रभावी ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए।