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भारत की दृश्यात्मक विरासत के शिल्पकार रघु राय नहीं रहे: कैंसर से लंबी जंग के बाद निधन, भोपाल गैस त्रासदी जैसे ऐतिहासिक पलों को अमर करने वाला युग समाप्त

editor
  • Awaaz Desk
  • April 26, 2026 01:04 PM
Raghu Rai, the architect of India's visual heritage, is no more. He died after a long battle with cancer. An era that immortalized historical moments like the Bhopal gas tragedy has ended.

नई दिल्ली। भारत की दृश्यात्मक विरासत को अपने कैमरे में सहेजने वाले महान फोटोग्राफर रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे। रविवार सुबह उन्होंने एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 83 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे और पिछले कुछ समय से अस्पताल में भर्ती थे। रघु राय के निधन के साथ ही भारतीय फोटोग्राफी के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। उनके जाने से कला जगत, मीडिया और सिनेमा से जुड़े लोगों में गहरा शोक व्याप्त है। रघु राय के निधन की खबर से फिल्म और कला जगत स्तब्ध है। अभिनेत्री दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, भगवान आपकी आत्मा को शांति दें। वहीं प्रसिद्ध गायक और गीतकार स्वानंद किरकिरे और मशहूर फोटोग्राफर अतुल कासबेकर सहित कई हस्तियों ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। अतुल कासबेकर ने उन्हें देश के महानतम व्यक्तियों में से एक बताते हुए कहा कि उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है।

कैंसर से लंबी लड़ाई
रघु राय के बेटे और फोटोग्राफर नितिन राय ने उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उनके पिता को दो वर्ष पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। इलाज के बाद स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन बाद में कैंसर दोबारा लौटा और धीरे.धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया। हाल ही में यह दिमाग तक पहुंच गया, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी।

कैमरे से इतिहास को जीवंत करने वाले कलाकार
1942 में ब्रिटिश भारत के झांग (अब पाकिस्तान में) में जन्मे रघु राय ने फोटोग्राफी की शुरुआत अपने बड़े भाई एस पॉल से सीखी। उन्होंने 1960 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और जल्द ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली। रघु राय को विशेष रूप से भोपाल गैस त्रासदी जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को अपने कैमरे में कैद करने के लिए जाना जाता है। उनकी तस्वीरों ने उस भयावह त्रासदी को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर दिया और पीड़ितों की पीड़ा को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनकी फोटोग्राफी केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं थी, बल्कि वह भारत की आत्मा, संस्कृति और सामाजिक यथार्थ का गहरा प्रतिबिंब थी। रघु राय सिर्फ एक फोटोग्राफर नहीं थे, बल्कि भारत की आत्मा को समझने और उसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाले कलाकार थे। उनकी तस्वीरें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और इतिहास का जीवंत दस्तावेज बनी रहेंगी। उनका जाना भारतीय कला और पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।


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