बयान पर घिरे राम माधवः भारत-अमेरिका रिश्तों पर टिप्पणी से मचा घमासान! टैरिफ और तेल आयात पर सवाल
नई दिल्ली। भाजपा और आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ नेता राम माधव के एक बयान ने देश में सियासी घमासान छेड़ दिया है। वॉशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए क्या कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद किया, रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई और अमेरिकी टैरिफ का भी विरोध नहीं किया। तो फिर आखिर भारत अमेरिका के साथ काम करने में कहां कमी कर रहा है। दरअसल, राम माधव वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में एक पैनल चर्चा में शामिल हुए थे। पैनल में पूर्व अमेरिकी राजनयिक एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड और अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल भी मौजूद थे। इस दौरान माधव से अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने से जुड़ा सवाल पूछा गया। जवाब में राम माधव ने कहा कि भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति दी। हमने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर भी सहमति दी, जबकि विपक्ष ने काफी आलोचना की। हमने 50 प्रतिशत टैरिफ को भी स्वीकार किया। स्वीकार करने का मतलब है कि हमने ज्यादा विरोध नहीं किया। हमने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने आगे कहा कि अब नए ट्रेड डील में हमने 18 प्रतिशत टैरिफ भी स्वीकार किया है, जो पहले से ज्यादा है। तो आखिर भारत कहां पीछे रह रहा है? ऐसे कौन से मुद्दे हैं जहां भारत अमेरिका के साथ काम करने में कमी कर रहा है। अमेरिका में दिए गए उनके बयान को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद खुद राम माधव को सफाई देते हुए माफी मांगनी पड़ी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राम माधव के बयान को लेकर दावा किया कि यह संगठन असल में ‘राष्ट्रीय सरेंडर संघ’ है और उसके नेता ने ही उसे बेनकाब कर दिया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अमेरिका में राम माधव ने ही आरएसएस की पोल खोलकर रख दी थी। वहीं राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राष्ट्रीय सरेंडर संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद, अमेरिका में शुद्ध गुलामी। उन्होंने कहा कि राम माधव ने ही संघ का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है।