• Home
  • News
  • Ranchi University's Glorious 67 Years: Innovation to Soar to New Heights with NEP; Primary Focus on Research and Skill Development.

रांची विश्वविद्यालय के गौरवशाली 67 वर्ष: अब एनईपी के संग उड़ेगा नवाचार का नया आसमान, शोध और कौशल विकास पर रहेगा मुख्य फोकस

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 10, 2026 11:07 AM
Ranchi University's Glorious 67 Years: Innovation to Soar to New Heights with NEP; Primary Focus on Research and Skill Development.

रांची। झारखंड की उच्च शिक्षा के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित केंद्रों में से एक, रांची विश्वविद्यालय ने अपनी गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा के 67 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का अत्यंत उत्साह, उमंग और गरिमापूर्ण माहौल में शंखनाद हुआ। सामूहिक 'वंदे मातरम्' के सुमधुर गायन और अतिथियों द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस उत्सव में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, पूर्व अधिकारियों और विभिन्न संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों की भारी भागीदारी देखी गई।

स्थापना दिवस का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था, जब मंच से उन होनहार विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्हें देश के राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त हो चुका है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर खेल के मैदान में विश्वविद्यालय का तिरंगा लहराने वाले उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मौके पर कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धियां ही संस्थान की असली पूंजी हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर करने की राह दिखाएंगी। समारोह को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. डॉ.सरोज शर्मा ने विश्वविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक, सामाजिक और शोध परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने गौरव के साथ बताया कि वर्तमान में लगभग १६ हजार विद्यार्थी इस परिसर से अपने सपनों को आकार दे रहे हैं। कुलपति ने विश्वविद्यालय के भविष्य का खाका खींचते हुए बड़ा ऐलान किया। आगामी शैक्षणिक सत्र पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप संचालित होगा। हमारा उद्देश्य अब विद्यार्थियों को केवल कागजी डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार के अनुकूल रोजगारपरक, कौशल आधारित और शोधोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए विश्वविद्यालय में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की स्थापना की गई है, जो राज्य में शोध कार्यों को एक नई दिशा और अभूतपूर्व गति देगी। प्रो. शर्मा ने स्पष्ट किया कि रांची विश्वविद्यालय केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य और फाइन आर्ट्स को भी पाठ्यक्रम में समान महत्व दिया जा रहा है। इसी कड़ी में, तीन दिनों तक चलने वाले इस समारोह के दूसरे दिन विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए एक भव्य कला, संस्कृति और फाइन आर्ट्स प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 12 जुलाई को होने वाले समापन समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। इस समापन वेला को यादगार बनाने के लिए पूरे परिसर में एक व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम भी चलाया जाएगा, जिसके जरिए 'हरित परिसर, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण' का एक मजबूत सामाजिक संदेश दिया जा सके। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड स्टेट एजुकेशन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष नरेंद्र भगत उपस्थित थे, जिन्होंने विश्वविद्यालय के योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा के साथ रजिस्ट्रार, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, विभिन्न संकायों के डीन, पूर्व कुलपति, पूर्व रजिस्ट्रार सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह ६७वां स्थापना दिवस केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न नहीं है, बल्कि नए भारत के निर्माण में रांची विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी 'इनोवेशन और एजुकेशनल हब' के रूप में स्थापित करने का एक ठोस संकल्प है।


संबंधित आलेख: