चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में फिर बगावत! धारचूला विधायक हरीश धामी ने सामूहिक इस्तीफों का किया आह्वान
देहरादून। उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मी के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह अब एक बड़े विद्रोह की शक्ल लेती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 'राजनीतिक अवकाश' पर जाने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। अब धारचूला से कांग्रेस के कद्दावर विधायक हरीश धामी ने सीधे अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हरीश रावत के समर्थकों से 'सामूहिक इस्तीफे' की अपील कर डाली है।
विवाद की जड़ 28 मार्च को हुई 6 नेताओं की जॉइनिंग से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि हरीश रावत रामनगर के नेता संजय नेगी को पार्टी में शामिल कराना चाहते थे, लेकिन उनकी अनदेखी की गई। इससे नाराज होकर रावत 15 दिनों के राजनीतिक अवकाश पर चले गए। इस बीच, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने हरीश रावत को 'गलतफहमी पालने वाला नेता' बता दिया, जिसके बाद रावत खेमा बुरी तरह भड़क उठा है। विधायक हरीश धामी ने सोशल मीडिया पर एक विस्फोटक पोस्ट साझा करते हुए हरक सिंह रावत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हरक सिंह को 2016 में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने वाला नेता बताते हुए कहा, "हरक सिंह रावत भरोसे के लायक नहीं हैं। उन्होंने ही देवभूमि में दलबदल का महापाप शुरू किया था, जिससे कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ। हाईकमान को यह नहीं भूलना चाहिए कि जो एक बार धोखा दे सकता है, वह दोबारा भी दे सकता है। हरीश धामी यहीं नहीं रुके। उन्होंने हरीश रावत के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर करते हुए लिखा, "जहां हमारे नेता (हरीश रावत), वहां हम। मैं सभी समर्थकों से अपील करता हूं कि उनके आत्मसम्मान के लिए हमें सामूहिक इस्तीफा दे देना चाहिए।" धामी के इस खुले विद्रोह ने कांग्रेस संगठन के भीतर हड़कंप मचा दिया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी रावत का समर्थन किया है, जिससे पार्टी दो फाड़ होती नजर आ रही है। चुनावों से ठीक पहले वरिष्ठ नेताओं के बीच शुरू हुई यह 'जुबानी जंग' कांग्रेस की राह मुश्किल कर सकती है। एक तरफ जहां भाजपा चुनावी मोड में है, वहीं कांग्रेस के भीतर 'अपनों' की ही घेराबंदी हाईकमान के लिए सिरदर्द बन गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस बगावत को शांत नहीं किया गया, तो पार्टी को भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।