बागेश्वर में जंगली जानवरों के आतंक से मिलेगी राहत! बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स, गांवों में ड्रोन-ट्रैप कैमरों से होगी निगरानी
बागेश्वर। जिले के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और मानव-वन्यजीव संघर्ष से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले बंदरों और जंगली सूअरों से लेकर रिहायशी इलाकों में पहुंचने वाले भालू और गुलदारों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग अब स्पेशल टास्क फोर्स तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। विभाग का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई के साथ ही मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना है। प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) बागेश्वर प्रकाश आर्य ने बताया कि जिले में वन्यजीवों से संबंधित समस्याओं को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की कार्रवाई चल रही है। टीम के सक्रिय होने के बाद उन गांवों और इलाकों में विशेष निगरानी की जाएगी, जहां लगातार जंगली जानवरों की आवाजाही और हमलों की शिकायतें सामने आती हैं। वन विभाग की प्रस्तावित स्पेशल टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करना होगा। जिस गांव में बंदर, जंगली सूअर, भालू या गुलदार का आतंक सामने आएगा, वहां टीम गश्त करेगी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेगी।DFO के मुताबिक, निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन और ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। इससे वन विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि जंगली जानवर किस इलाके में सक्रिय हैं और उनकी आवाजाही का पैटर्न क्या है। लगातार निगरानी के जरिए वन विभाग वन्यजीवों की मौजूदगी का समय रहते पता लगाने का प्रयास करेगा, जिससे रिहायशी इलाकों में खतरा बढ़ने से पहले आवश्यक कार्रवाई की जा सके। बागेश्वर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों और जंगली सूअरों के कारण किसानों को फसलों के नुकसान की शिकायत रहती है। वहीं, जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों के आसपास पहुंचने वाले गुलदार और भालू लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं। ऐसे में टास्क फोर्स के जरिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है। ड्रोन से बड़े क्षेत्र पर नजर रखी जा सकेगी, जबकि ट्रैप कैमरों की मदद से वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकेगा।