देशद्रोह' का खौफ दिखाकर रिटायर्ड फौजी को किया 'डिजिटल अरेस्ट', शादी के लिए रखे 3.30 लाख रुपये ठगे
पटना। बिहार की राजधानी पटना में साइबर अपराधियों के दुस्साहस और क्रूरता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। देश की सीमा पर दुश्मनों का मुकाबला करने वाले एक रिटायर्ड सैन्यकर्मी को अपराधियों ने 'देशद्रोह' के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर न सिर्फ 'डिजिटल अरेस्ट' किया, बल्कि उनसे गाढ़ी कमाई के 3.30 लाख रुपये भी ठग लिए। ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित इस कदर गहरे सदमे और मानसिक तनाव में चले गए कि उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने (आत्महत्या) का प्रयास भी किया। हालांकि, परिजनों की सूझबूझ से समय रहते उनकी जान बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना पटना के मंदिरी इलाके की है। घटना की शुरुआत रिटायर्ड फौजी के मोबाइल पर आए एक अनजान फोन कॉल से हुई। कॉल करने वाले शख्स ने खुद को एक प्रतिष्ठित बैंक का अधिकारी बताया। उसने पीड़ित को डराते हुए कहा, "आपके नाम पर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक शाखा में खाता चल रहा है। इस खाते से करोड़ों रुपये का संदिग्ध और अवैध लेनदेन हुआ है।" जब रिटायर्ड फौजी ने इस बात से साफ इनकार किया और कहा कि उनका ऐसा कोई खाता नहीं है, तो कॉलर ने उन्हें और डराने के लिए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और अब उन्हें सीधे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी से बात करनी होगी। कुछ ही देर बाद पीड़ित के पास एक दूसरे व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उसने बेहद कड़क लहजे में फौजी से कहा कि आपका बैंक खाता अपराधियों को बेचा गया है और उसी खाते के जरिए 'देशद्रोह' जैसी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों में पैसों का लेनदेन हुआ है। अपराधियों ने पीड़ित के मन में डर का माहौल पैदा करने के लिए उनके घर की तस्वीरें और पुलिस की वर्दी पहने कुछ लोगों की तस्वीरें उनके मोबाइल पर भेजीं। इससे रिटायर्ड फौजी पूरी तरह घबरा गए और उन्हें लगा कि वे वास्तव में पुलिस की कड़ी निगरानी में हैं। साइबर ठगों ने इसके बाद उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया। वे लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए करीब 10 दिनों तक पीड़ित पर चौबीसों घंटे नजर बनाए रहे। जालसाजों ने सैन्यकर्मी को सख्त हिदायत दी थी कि वे इस मामले की चर्चा अपने परिवार या किसी भी बाहरी व्यक्ति से न करें, अन्यथा तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके फौजी को ठगों ने झांसा दिया कि यदि वे 'जांच' में सहयोग करेंगे और उनके बताए खाते में पैसे भेजेंगे, तो जांच के बाद उन्हें निर्दोष साबित कर दिया जाएगा। गिरफ्तारी और बदनामी के डर से पीड़ित ने ठगों के झांसे में आकर अपने बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 3.30 लाख रुपये अपराधियों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बताया जाता है कि यह राशि पीड़ित ने अपने परिवार के एक सदस्य की आगामी शादी के लिए बेहद मुश्किलों से जमा कर रखी थी। पैसे हड़पने के बाद जब साइबर ठगों ने पीड़ित से अपना संपर्क पूरी तरह तोड़ लिया और उनके नंबर बंद हो गए, तब जाकर रिटायर्ड फौजी को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का एहसास हुआ। जीवनभर की जमा-पूंजी और शादी के लिए रखे पैसे डूब जाने के गम में वे गहरे अवसाद में चले गए। वे कई दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकले। इसी मानसिक तनाव के बीच उन्होंने आत्मघाती कदम उठाते हुए जान देने की कोशिश की, लेकिन ऐन वक्त पर परिजनों ने उन्हें देख लिया और बचा लिया। इसके बाद पीड़ित ने रोते हुए परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर सबके होश उड़ गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन पीड़ित को लेकर तत्काल साइबर थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों के विवरण और लेनदेन के रूट के आधार पर साइबर शातिरों की पहचान और उनकी लोकेशन ट्रेस करने में जुट गई है। इस सनसनीखेज मामले के बाद पटना पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता के लिए बेहद जरूरी गाइडलाइन जारी की है। पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। कोई भी असली अधिकारी जांच के नाम पर किसी के निजी खाते में पैसे ट्रांसफर करने या आरटीजीएस करने की मांग नहीं करता है। यदि कोई आपको डराए या देशद्रोह/मनी लॉन्ड्रिंग का खौफ दिखाए, तो घबराएं नहीं। तुरंत फोन काटें और अपने परिवार को बताएं। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।