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मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा! बंदर अब्बास और केशम में फिर गूंजे धमाके, अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

editor
  • Awaaz Desk
  • July 13, 2026 12:07 PM
Risk of war escalates in the Middle East! Explosions heard again in Bandar Abbas and Qeshm; Iran targets US bases following American strikes.

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित रणनीतिक बंदर अब्बास और केशम द्वीप (केशम पोर्ट) के आसपास एक बार फिर जोरदार धमाकों की खबर सामने आई। ईरानी मीडिया के अनुसार दिन में दूसरी बार हुए इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। वहीं अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने जॉर्डन, ओमान, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, सुबह अमेरिकी मिसाइलों ने मशहर, जस्क, सिरिक, बंदर अब्बास और केशम पोर्ट क्षेत्र को निशाना बनाया था। इसके कुछ घंटे बाद उन्हीं इलाकों में फिर विस्फोट हुए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार अबदान शहर में तीन स्थानों पर मिसाइलें गिरीं, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य घायल हुए। खुजेस्तान प्रांत के अधिकारियों ने बताया कि हमले स्थानीय समयानुसार दोपहर के आसपास हुए और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिए गए। समाचार एजेंसी ने दावा किया कि हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों में देश के दक्षिणी तटीय इलाकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मछुआरों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की भी जान गई है। ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी थी। इसी क्रम में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस, बहरीन के शेख ईसा एयरबेस तथा ओमान और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। आईआरजीसी के अनुसार इन हमलों में ईंधन भंडारण केंद्र, गोला-बारूद बंकर, ड्रोन कमांड सेंटर और कुछ अन्य सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान दोनों ने इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा किया है। हाल के दिनों में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों और समुद्री आवाजाही में आई बाधाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ा दी है। तेल कीमतों पर इसका असर देखा जा रहा है और वैश्विक शिपिंग कंपनियां स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पहले हुए अंतरिम समझौते के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कूटनीतिक प्रयासों के बीच जारी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने युद्धविराम की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन दोनों पक्षों की आक्रामक सैन्य कार्रवाई से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ता जा रहा है।
 


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