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'विकसित उत्तराखंड' का रोडमैप: ₹6,940 करोड़ की 12 महापरियोजनाओं की सीएम धामी ने की समीक्षा, 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने की डेडलाइन

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 08, 2026 10:06 AM
Roadmap for a 'Developed Uttarakhand': CM Dhami reviews 12 mega-projects worth ₹6,940 crore; deadline set to complete work by October 15.

देहरादून। देश को साल 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को गति देने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में 'प्रगति पोर्टल' के जरिए राज्य की तमाम महत्वपूर्ण अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन और अन्य प्रमुख विभागों की 6,940 करोड़ रुपये की कुल 12 बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की बिंदुवार जानकारी ली गई। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं का 50 फीसदी तक का काम पूरा हो चुका है, उन्हें हर हाल में 15 अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लिया जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास कार्यों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सभी परियोजनाओं के कामों में तेजी लाने के लिए अब मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने और मुख्य सचिव स्तर पर हर 10 दिनों में अनिवार्य रूप से समीक्षा बैठक की जाएगी। सीएम धामी ने साफ लहजे में कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण करना है। परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब से न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनहित और आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अब से किसी भी प्रोजेक्ट में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रगति पोर्टल के माध्यम से हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के विकास और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण निम्नलिखित प्रोजेक्ट्स की वर्तमान स्थिति को परखा गया। रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, तथा ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला। बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र (सब-स्टेशन) परियोजनाएं। चारधाम सड़क परियोजनाएं, सीमांत क्षेत्रों का अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना, और हरिद्वार व काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं। बैठक में यह बात सामने आई कि कई परियोजनाएं भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण और क्षतिपूर्ति भुगतान जैसे प्रशासनिक कारणों से लंबित हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को सीधे निर्देश दिए कि वे जिला स्तर पर ऐसे लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी  करें और उनका तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करें। विभागों को भी आपसी समन्वय बनाकर त्वरित कार्रवाई करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने इन प्रोजेक्ट्स के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक सड़कें, बिजली और परिवहन से जुड़े ये कार्य उत्तराखंड के समग्र विकास की रीढ़ हैं। इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से न केवल स्थानीय जनता और तीर्थयात्रियों को बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि राज्य में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को भारी बढ़ावा मिलेगा। सीएम ने अंत में निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की प्रगति उम्मीद से कम है, उनके लिए तुरंत एक 'विशेष कार्ययोजना' तैयार कर जल्द से जल्द धरातल पर परिणाम दिखाए जाएं।


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