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झारखंड में 18,901 करोड़ रुपये 10 साल से पड़े निष्क्रिय, वित्त मंत्री का सख्त आदेश-एक महीने में राजकोष में लौटाएं रकम

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 14, 2026 05:07 AM
Rs 18,901 crore lying idle in Jharkhand for 10 years; Finance Minister issues strict order to return the amount to the treasury within one month.

झारखंड में वित्तीय अनुशासन को ताक पर रखकर जनता की भलाई के पैसों को दबाए रखने का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों में पिछले 10 वर्षों से विकास योजनाओं के 18,901.74 करोड़ रुपये (लगभग 19 हजार करोड़) पीएल (पर्सनल लेजर) अकाउंट्स में पूरी तरह निष्क्रिय और बेकार पड़े रहे। विभागों की इस मनमानी और कारगुजारी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के वित्त विभाग ने इस राशि की निकासी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वित्त मंत्री ने इसे वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन मानते हुए सभी विभागों को आदेश दिया है कि वे इस भारी-भरकम राशि को तत्काल सरकारी राजकोष (ट्रेजरी) में वापस जमा कराएं।

दरअसल, जब कोई सरकारी विभाग अपनी किसी योजना की राशि को निर्धारित चालू वित्तीय वर्ष के भीतर खर्च नहीं कर पाता है, तो नियमों के मुताबिक उसे वह पैसा सरकार को वापस (सरेंडर) करना होता है। लेकिन झारखंड के विभागों ने एक नया रास्ता निकाल लिया; वे बजट लैप्स होने के डर से इस पैसे को सरेंडर करने के बजाय अपने-अपने विभागीय 'पीएल अकाउंट्स' (सरकारी बैंकों में खुले विशेष खातों) में जमा करा देते थे। इस तरह जनता के विकास का पैसा जमीन पर खर्च होने के बजाय सालों-साल बैंकों में धूल फांकता रहा। अब मंदी और वित्तीय तंगहाली के बीच, कई विभागों ने वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजकर मांग की थी कि उन्हें पिछले 10 वर्षों से इन पीएल खातों में जमा पड़ी पुरानी राशि को निकालने और खर्च करने की अनुमति दी जाए। विभागों के इस प्रस्ताव को वित्तीय नियमों के खिलाफ मानते हुए वित्त विभाग ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक महीने के भीतर दूसरी बार विभागीय सचिवों को पत्र लिखकर सख्त लहजे में चेतावनी दी है। इससे पहले 19 जून को उन्होंने पत्र भेजकर राशि लौटाने को कहा था। 10 जुलाई को दोबारा पत्र भेजकर उन्होंने अविलंब कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। एक अप्रैल 2023 से पहले पीएल अकाउंट में जितनी भी राशि जमा की गई थी, उसे विभाग तुरंत राजकोष में जमा कराएं। वर्तमान वित्तीय वर्ष के अलावा केवल पिछले तीन वर्षों (यानी कुल चार साल) का पैसा ही पीएल अकाउंट में रखा जा सकता है। सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देना चाहती है, न कि पैसों को खातों में बंद रखना चाहती है। वित्त विभाग की इस कड़ाई के बाद बैकफुट पर आए विभागों ने अब तक लगभग 3,000 करोड़ रुपये राजकोष में वापस जमा भी करा दिए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल ₹18,901.74 करोड़ की भारी-भरकम राशि इन प्रमुख विभागों के खातों में निष्क्रिय पड़ी है। गौरतलब है कि झारखंड के पूर्व वित्त सचिव अमित खरे ने इस वित्तीय अराजकता को रोकने के लिए पूर्व में एक सख्त गाइडलाइन बनाई थी। इस गाइडलाइन के तहत किसी भी विभाग को दो वर्ष से अधिक पुरानी राशि पीएल अकाउंट में रखने की इजाजत नहीं थी। नियमों के तहत वित्त विभाग ने अब इन सभी निष्क्रिय पड़े खातों को 'लॉक' कर दिया है। अब वित्त विभाग की विशेष अनुमति और पूरी समीक्षा के बाद ही इस राशि का भविष्य तय होगा। राज्य में सड़क, बिजली, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का बजट इस तरह दबाकर रखे जाने को लेकर अब विपक्ष भी सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।


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