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धुएं की चादर में ढका रुद्रप्रयाग: जंगलों की आग और वाहनों के दबाव से उबला पहाड़, 40 डिग्री तक पहुँचा पारा

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 21, 2026 06:05 AM
Rudraprayag Shrouded in a Blanket of Smoke: The Mountains Simmer Under the Pressure of Forest Fires and Vehicular Traffic; Mercury Soars to 40 Degrees.

रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड का दिल कहा जाने वाला रुद्रप्रयाग जनपद इन दिनों एक भीषण पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। जंगलों में धधकती आग और आसमान में छाए घने धुएं ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थिति यह है कि पहाड़ और गहरी घाटियां पूरी तरह से धुएं की मोटी चादर से पैक हो चुकी हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य गायब हो गया है बल्कि आम जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह दस बजते ही सूरज की तपिश और धुएं का कॉकटेल तापमान को 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा रहा है, जिसने पहाड़ों में मैदानी इलाकों जैसी गर्मी का अहसास करा दिया है।

कुछ दिनों पहले हुई हल्की बारिश से उम्मीद जगी थी कि जंगलों की आग (दावानल) शांत हो जाएगी और वन विभाग को राहत मिलेगी। लेकिन मौसम के बदलते ही तेज धूप और बढ़ती गर्मी ने आग को दोबारा भड़का दिया है। रुद्रप्रयाग और केदारघाटी के जंगलों से उठ रहा काला और गाढ़ा धुआं अब पूरी घाटी में फैल चुका है। सूखी पत्तियां और तेज हवाएं इस आग को और भड़काने का काम कर रही हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुँच रहा है। इस संकट का सीधा असर केदारनाथ धाम की यात्रा पर पड़ रहा है। घाटी में धुएं के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) इतनी कम हो गई है कि कई इलाकों में आधा किलोमीटर दूर देखना भी दूभर हो गया है। इस बेहद कम दृश्यता के बीच ही केदारनाथ धाम के लिए संचालित होने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं उड़ान भरने को मजबूर हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि धुएं का गुबार इसी तरह बढ़ता रहा, तो हवाई सेवाओं पर ब्रेक भी लग सकता है। एक तरफ जहाँ जंगल सुलग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बद्रीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चारधाम यात्रियों के वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला साइलेंसर का धुआं और जंगलों की आग की तपिश मिलकर वातावरण को 'ग्रीनहाउस' में तब्दील कर रहे हैं। इस दोहरी मार के कारण रुद्रप्रयाग के तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जा रही है। पर्यावरण में घुले इस जहर का सीधा असर स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। लोग सांस लेने में दिक्कत, आंखों में भीषण जलन, सूखी खांसी और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुँच रहे हैं। डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी है। बढ़ती गर्मी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वन विभाग और जिला प्रशासन के लिए आग पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रही हैं और आग बुझाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन सूखी ढलानों पर लगी आग हर दिन नए क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक भारी बारिश नहीं होती, तब तक इस धुएं और गर्मी से निजात मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। फिलहाल, चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इस अभूतपूर्व संकट के बीच दिन काटने को मजबूर हैं।


 


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